
नई दिल्ली. राजधानी में वायु प्रदूषण (Air Pollution) रोकने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट(Supreme court) की सख्ती के बाद दिल्ली सरकार एक्शन में आ गई है। प्रदूषण फैलाने वाले व्हीकल्स के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। पिछले 72 घंटे में ऐसे वाहनों से 1 करोड़ रुपए वसूले गए। इस बीच शुक्रवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (Delhi AQI) 332 रहा। यह बेहद खराब श्रेणी में आती है। हालांकि पिछले दिन के मुकाबले इसमें कमी आई है। 18 नवंबर को AQI 362 था।
NASA ने खींची पराली से उठते धुएं की तस्वीर
18 नवंबर को दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सेंटर फॉर साइंस एंड एंवायरोमेंट (CSE) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए बाहरी स्रोतों का योगदान 69% है और दिल्ली के अपने स्रोतों का योगदान 31% है। यह स्टडी 2016 में दिल्ली में एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट(टेरी) ने कराई थी। इस बीच अमेरिकी संस्था NASA ने एक तस्वीर शेयर की है। यह तस्वीर 11 नवंबर को खींची गई थी। इसमें पंजाब और हरियाणा में जलाई गई पराली का धुआं दिल्ली की ओर बढ़ते दिख रहा है। तस्वीर में दिल्ली-NCR की ओर बढ़ते धुएं को लाल बिंदु से दर्शाया गया है।
नासा ने अपने ब्लॉग में इसका जिक्र किया है। इसके अनुसार 11 नवंबर 2021 को सुओमी एनपीपी उपग्रह पर विज़िबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सूट (VIIRS) ने पंजाब और हरियाणा में आग(पराली) से उठे धुएं को दिल्ली की ओर बढ़ते देखा जा सकता है। एक वैज्ञानिक के हवाले से लिखा गया कि इस दिन करीब 22 मिलियन लोग धुएं से प्रभावित हुए हैं।
50 तक AQI माना जाता है अच्छा
एयर क्वालिटी इंडेक्स 0 से 50 के बीच अच्छा माना जाता है। 51 से 100 के बीच यह संतोषजनक, जबकि 101 से 200 के बीच मध्यम माना जाता है। 201 से 300 के बीच यह खराब श्रेणी में आता है और 301 से 400 के बीच बेहद खराब। 401 से 500 के बीच एयर क्वालिटी इंडेक्स गंभीर श्रेणी में आता है
एक स्टडी में ओजोन को बताया जिम्मेदार
हाल में एक अंतरराष्ट्रीय स्टडी में खुलासा हुआ कि दिल्ली में पिछले साल Corona महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन में उम्मीद थी कि वायु प्रदूषण कम होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसकी वजह ओजोन(Ozone-O3) को माना गया। कनाडा स्थित यॉर्क यूनिवर्सिटी (York University) ने इस बारे में एक स्टडी की थी। इससे पता चला कि दिल्ली में पहले लॉकडाउन के दौरान प्रदूषणकारी तत्व तो कम हुए थे, लेकिन ओजोन के स्तर (Ozone Level) में कोई कमी नहीं आई थी। तब यातायात बेहद कम था। इसलिए आसमान एकदम साफ था। बावजूद प्रदूषण कम नहीं हुआ था। यह स्टडी Environmental Science: Processes & Impacts जर्नल में छपी है।
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