
नई दिल्ली। दिल्ली लाल किले के पास हुए जानलेवा ब्लास्ट ने राजधानी की शांति हिला कर रख दी। इस धमाके में कम से कम 12 लोग मारे गए और 20 से ज़्यादा घायल हुए। यह हादसा केवल एक स्थान पर नहीं, बल्कि कई परिवारों की दुनिया को पूरी तरह बदल कर रख गया। लोक नायक अस्पताल के बाहर परिवार वालों के रोने की आवाज़ें गूंज रही हैं, और उनके बीच एक अजीब खामोशी भी छाई हुई है।
बिहार के पंकज सैनी 22 साल के युवा थे, जो चांदनी चौक में कैब ड्राइवर के रूप में काम करते थे। हादसे के समय वे एक पैसेंजर को छोड़कर लौट रहे थे। उत्तर प्रदेश के शामली के नोमान अपनी कॉस्मेटिक दुकान के लिए सामान लेने गए थे और दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन में कंडक्टर अशोक कुमार अपने दूसरे परिचित से मिलने जा रहे थे। ये सभी लोग अपने परिवारों के मुख्य कमाने वाले थे। अचानक एक सफेद i20 कार में हुए सुसाइड ब्लास्ट ने उनकी जिंदगी और परिवारों की दुनिया उलट-पुलट कर दी।
पंकज सैनी के पिता ने मीडिया से कहा, "हम सरकार से इंसाफ की उम्मीद करते हैं। हमारे बेटे की मौत से परिवार का भविष्य अंधकार में है।" अशोक कुमार, जो आठ लोगों के परिवार में अकेले कमाने वाले थे, अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ दिल्ली में रहते थे। उनके चचेरे भाई ने बताया कि उन्हें लिस्ट में अशोक का नाम देखकर पता चला कि हादसा उनके परिवार को कैसे तोड़ गया। नोमान की मौके पर ही मौत हो गई और उसका चचेरा भाई घायल हो गया।
सुरक्षा एजेंसियां, एनआईए और दिल्ली पुलिस इस मामले की गहन जांच में जुटी हैं। 1,000 से अधिक CCTV फुटेज क्लिप्स की जांच की जा रही है। सवाल यह है कि क्या जांचकर्ता ब्लास्ट के मास्टरमाइंड और उसके नेटवर्क तक पहुँच पाएंगे।
अस्पताल के बाहर परिवार वालों की चीखों के बीच एक अजीब सी खामोशी है। बुज़ुर्गों के आँसुओं और टूटते सपनों के बीच यह दृश्य यह सवाल उठाता है कि क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्था इन हमलों को रोकने में सक्षम है?
यह धमाका सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है। पीड़ित परिवार अब न्याय की उम्मीद में हैं और देशवासियों के लिए यह सवाल बना हुआ है कि क्या सुरक्षा एजेंसियां समय रहते अपराधियों को पकड़ेंगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।
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