
बेंगलुरु. भारत ने ड्रोन, कृत्रिम मेधा जैसी तकनीकों और वृहद डाटा का इस्तेमाल कर देश का 10 सेंटीमीटर रिजॉल्यूशन का डिजिटल मानचित्र तैयार करने कीपरि योजना शुरू की है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग के अंग भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने तीन महीने पहले यह अत्यंत कठिन काम अपने हाथ में लिया और इसे दो साल में पूरा करने की योजना है।
पांच राज्यों में सर्वेक्षण जारी
विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, अब हम उसे (भारतीय सर्वेक्षण विभाग) को ड्रोन, कृत्रिम मेधा, वृहद डाटा का विश्लेषक और इमेज प्रोसेसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस उपकरण मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक बार परियोजना पूरी हो जाने के बाद, डाटा.. नागरिकों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों के लिए उपलब्ध होगा। उन्हें निर्णय लेने और योजना प्रक्रिया में इसका उपयोग करने का अधिकार होगा। वर्तमान में कर्नाटक, हरियाणा,महाराष्ट्र और गंगा बेसिन में सर्वेक्षण जारी है।
डिजिटल मानचित्र की जरूरत पर दिया जोर
आज भी हमारे पास पर्याप्त सटीकता बताने वाला भारत का डिजिटल मानचित्र नहीं है, लेकिन यह (नया डिजिटल मानचित्र जो तैयार किया जा रहा है) आपके द्वारा किए जाने वाले हर काम का आधार है, चाहे रेल की पटरियां या सड़क बिछानी हो, एक अस्पताल, गंगा की सफाई, कावेरी की सफाई या किसी भी तरह का विकास और योजना हो। अधिकारी ने एक प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (इसरो) इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है।
(यह खबर न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की है। एशियानेट हिंदी की टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
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