गिरफ्तार DMK विधायक का TVK पर बड़ा आरोप, कहा- 'ऊंटों की ट्रेडिंग' का मिला ऑफर

Published : Jul 04, 2026, 07:00 AM IST
DMK MLA Anitha R. Radhakrishnan (Photo/ANI)

सार

तमिलनाडु में DMK विधायक अनिता आर राधाकृष्णन की गिरफ्तारी से राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया है। विधायक ने आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए TVK की ओर से 'ऊंटों की ट्रेडिंग' का ऑफर दिया गया, लेकिन वह CM स्टालिन के प्रति वफादार रहेंगे।

चेन्नई (तमिलनाडु) [भारत], 4 जुलाई (एएनआई): तमिलनाडु में राजनीतिक माहौल उस वक्त गरमा गया जब डीएमके के वरिष्ठ विधायक अनिता आर राधाकृष्णन को गिरफ्तार कर लिया गया। अपनी गिरफ्तारी का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने नई बनी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के सदस्यों पर राजनीतिक दबाव बनाने के विस्फोटक आरोप लगाए। राधाकृष्णन को शनिवार को अतूर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था, जिसके तुरंत बाद उन्होंने मीडिया से बात की। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है, ताकि उन्हें विधानसभा से इस्तीफा देने और TVK में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा सके।

विधायक ने उन्हें दिए गए प्रस्तावों को पारंपरिक राजनीतिक पैंतरेबाज़ी से कहीं ज़्यादा आक्रामक बताते हुए कहा, "यह हॉर्स-ट्रेडिंग नहीं, बल्कि कैमल-ट्रेडिंग (ऊंटों का सौदा) का ऑफर था; ऐसा कभी नहीं होगा।" राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा कि अगर वह डीएमके छोड़ देते हैं तो उन्हें "पूरे समर्थन" का वादा किया गया था। इन कोशिशों को खारिज करते हुए, उन्होंने पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के प्रति अपनी वफादारी दोहराई।

उन्होंने घोषणा की, "मैं डीएमके में ही रहूंगा और मेरे पार्टी छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता... मैं कभी भी दबाव के आगे नहीं झुकूंगा।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनका राजनीतिक करियर वित्तीय लाभ के बजाय दशकों की पार्टी सेवा पर बना है।

पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

विधायक पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 352 और 353(2) के तहत शांति भंग करने वाले बयान देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। राधाकृष्णन ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले ही धारा 41ए के नोटिस का पालन करने और 10 जुलाई को पुलिस के सामने पेश होने की अपनी मंशा बता दी थी, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें डराने-धमकाने की रणनीति के तहत तत्काल गिरफ्तार करने के लिए इस प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया।

सियासी घमासान और राज्यपाल पर निशाना

इस गिरफ्तारी ने राज्य के राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग छेड़ दी है। कांग्रेस नेता मणिक्कम टैगोर ने इस विवाद पर अपनी राय देते हुए कहा कि यह घटना राजनीतिक संवाद के लिए एक सबक होनी चाहिए। टैगोर ने टिप्पणी की, "राजनीतिक नेतृत्व पर बोलने और हमले करने में कुछ शालीनता होनी चाहिए।"

मामले ने एक अजीब मोड़ तब ले लिया जब राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को उनके हालिया आचरण को लेकर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। स्थानीय राजनीति में राज्यपाल की कथित संलिप्तता पर टिप्पणी करते हुए, पर्यवेक्षकों ने स्कूलों और कॉलेजों में राज्यपाल की गतिविधियों पर चिंता जताई। एक अधिकारी ने कहा, "अगर आप गोवा जैसी राजनीति करना चाहते हैं, तो वहीं वापस जाएं... मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि वे अपनी सीमाएं न लांघें।"

सरकार की प्राथमिकताओं पर हमला

तत्काल कानूनी आरोपों से परे, राधाकृष्णन ने मौजूदा प्रशासन की प्राथमिकताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार पर अपने श्रीवैकुंठम निर्वाचन क्षेत्र में अवैध लॉटरी बिक्री, गांजा तस्करी और बढ़ते अपराध जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार का पूरा ध्यान आक्रामक राजनीतिक दांव-पेंच पर है।

जैसे-जैसे विधायक के खिलाफ कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ रही है, इस घटना ने सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान और TVK के बढ़ते प्रभाव के बीच गहरी होती खाई को उजागर कर दिया है, जिससे तमिलनाडु में एक अस्थिर राजनीतिक मौसम की बिसात बिछ गई है। (एएनआई)

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