
नई दिल्ली. उत्तराखंड के चमोली में तपोवन हाइडल परियोजना स्थल पर बचाव कार्य जारी है। इस बीच सुरंग के बाहर एक कुत्ता तीन दिनों से अपने मालिक का इंतजार कर रहा है। ग्लेशियर टूटने के बाद आई बाढ़ से बचने वाले राजिंदर कुमार ने बताया कि जब हम काम करते थे तो हम उसे (डॉग) खाना देते थे। सोने के लिए बोरी भी दे देते थे।
मजदूरों के साथ ही रहता था कुत्ता
एनटीपीसी के तपोवन विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना के 34 श्रमिक सुरंग के अंदर फंस गए। 168 लोग लापता हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब परियजना पर काम चल रहा था तो मजदूरों के साथ कुत्ता भी दिन भर रहता था, फिर शाम को मजदूर जाते तो कुत्ता भी चला जाता।
हादसे वाले दिन साइट पर नहीं था
हादसे वाले दिन वह साइट पर नहीं था। बाढ़ आने के कुछ देर बाद वह वापस साइट पर आया तो वहां कई अजनबी मौजूद थे। उसे उसका मालिक नहीं दिखा। वहां मशीनरी लगाई जा रही थी। चारों तरफ अफरातफरी थी। वहां मौजूद लोगों ने कुत्ते को भगाने की कोशिश की, लेकिन वह वहां से नहीं गया।
अब भी सुरंग के बाहर इंतजार में है
कुत्ता पूरे दिन सुरंग के बाहर बैठता है, पूरी रात इंतजार करता है। स्थानीय लोगों ने कहा कि हमें उम्मीद है कि वह जल्द ही अपने मालिक को देख सकेगा।
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