
नई दिल्ली [भारत], 10 जुलाई (एएनआई): नारायण हेल्थ के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. देवी शेट्टी ने भारतीयों से कम उम्र में ही दिल की सेहत की जांच शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि हर व्यक्ति को 17 साल की उम्र में ब्लड टेस्ट कराना चाहिए ताकि हाई कोलेस्ट्रॉल का पता चल सके और भविष्य में होने वाले कार्डियोवैस्कुलर रोगों के खतरे को कम किया जा सके।
कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के दिशानिर्देशों का जिक्र करते हुए डॉ. शेट्टी ने एएनआई को बताया कि 17 साल की उम्र में कोलेस्ट्रॉल की जांच से उन लोगों की जल्दी पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें खतरा है। इससे वे जीवनशैली और खान-पान में बदलाव करके इस स्थिति को मैनेज कर सकते हैं।
उन्होंने आगे सलाह दी कि 35 से 40 साल की उम्र के सभी पुरुषों को नियमित रूप से हार्ट की स्क्रीनिंग करानी चाहिए, जिसमें हार्ट का सीटी स्कैन भी शामिल है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिन लोगों के परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास रहा है, उन्हें जांच के लिए 30 की उम्र के आखिर तक इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, "जिनके परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें 30 साल की उम्र में ही जांच के लिए जाना चाहिए।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि डायबिटीज के मरीजों को कार्डियक इवैल्यूएशन और भी पहले कराना चाहिए। उन्होंने ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल लेवल और अन्य कार्डियक पैरामीटर्स जैसे प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों की नियमित निगरानी के महत्व पर भी जोर दिया।
युवाओं के बीच एडवेंचर और एंड्योरेंस स्पोर्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए डॉ. शेट्टी ने कहा कि एक्सट्रीम स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने वाले किशोरों के लिए भी कार्डियक स्क्रीनिंग जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक बेसिक हार्ट चेक-अप, जिसमें साधारण टेस्ट शामिल होते हैं और जो एक घंटे के भीतर पूरे हो सकते हैं, हर साल किया जाना चाहिए।
उनके मुताबिक, अगर कार्डियक सीटी स्कैन नॉर्मल आता है, तो इसे सात से दस साल तक दोहराने की जरूरत नहीं पड़ सकती है।
एक्सरसाइज के दौरान अचानक होने वाली कार्डियक डेथ पर चिंता जताते हुए डॉ. शेट्टी ने कहा कि ऐसी घटनाएं आम नहीं हैं, लेकिन अक्सर इसलिए होती हैं क्योंकि दिल की छिपी हुई बीमारी का पता ही नहीं चल पाता।
उन्होंने कहा कि बहुत से लोग गलती से यह मान लेते हैं कि वे स्वस्थ हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे फिट महसूस करते हैं। उन्होंने कहा, "आपको दिल की गंभीर समस्या हो सकती है और फिर भी आपको इसका पता नहीं चलेगा।" उन्होंने आगे कहा कि ट्रेडमिल पर दौड़ते, मैराथन में हिस्सा लेते या सामान्य शारीरिक गतिविधियां करते समय लोगों के गिरने के कई मामलों को समय पर स्क्रीनिंग के जरिए रोका जा सकता था।
उन्होंने कहा कि ब्लड टेस्ट, ईसीजी और कार्डियक सीटी स्कैन जैसी सामान्य जांचों से ब्लॉकेज के जानलेवा होने से पहले ही उसका पता लगाया जा सकता है, जिससे मरीज समय पर इलाज शुरू कर सकते हैं।
डॉ. शेट्टी ने कहा कि भारत में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि बहुत से लोग लक्षण विकसित होने तक डॉक्टरों के पास जाने से बचते हैं, जिससे वे गंभीर हृदय रोगों को रोकने का मौका चूक जाते हैं। (एएनआई)
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