ड्रग्स और हथियार पहुंचाने के लिए पाकिस्तान बड़े पैमाने पर कर रहा ड्रोन का इस्तेमाल, करना होगा अचूक उपाय

Published : Nov 13, 2022, 08:05 AM ISTUpdated : Nov 13, 2022, 08:12 AM IST
ड्रग्स और हथियार पहुंचाने के लिए पाकिस्तान बड़े पैमाने पर कर रहा ड्रोन का इस्तेमाल, करना होगा अचूक उपाय

सार

बीएसएफ के डीजी पंकज कुमार सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान की ओर से भारत में ड्रग्स, हथियार और गोला-बारूद पहुंचाने के लिए ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। 2022 में 266 ड्रोन उड़ान का पता चला है।  

नई दिल्ली। भारत में ड्रग्स और हथियार पहुंचाने के लिए पाकिस्तान की ओर बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। बीएसएफ का कहना है कि इसे रोकने के लिए अचूक उपाये करना होगा। बीएसएफ के डीजी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पाकिस्तान से पंजाब और जम्मू की सीमाओं पर ड्रोन द्वारा ड्रग्स, हथियार और गोला-बारूद लाने के मामले 2022 में दोगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। 

पंकज कुमार सिंह ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से आए ड्रोन की जांच के लिए दिल्ली में अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इसके बहुत अच्छे रिजल्ट मिले हैं। इसकी मदद से पता लगाया जा रहा है कि ड्रोन कहां से भेजे गए और कहां जाने वाले थे। इसके साथ ही यह भी मालूम चलता है कि किन अपराधियों को ड्रग्स या अधिकार की सप्लाई की गई है।

ड्रोन से की गई बमबारी
पंकज सिंह ने बताया कि पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान द्वारा भेजे गए ड्रोन से बमबारी तक हुई है। बीएसएफ काफी समय से ड्रोन खतरे का सामना कर रहा है। ड्रोन हमारे लिए समस्या खड़ी कर रहे हैं। पाकिस्तान की ओर से कई तरह के ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है। अधिक ऊंचाई पर उड़कर ड्रोन सीमा पार कर जाते हैं। 2020 में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर करीब 79 ड्रोन के उड़ने का पता चला था। 2021 में यह संख्या बढ़कर 109 और 2022 में 266 हो गई है। 2022 में पंजाब में ड्रोन के 215 उड़ानों का पता चला। वहीं, जम्मू में 22 ड्रोन उड़ानों का पता चला है।

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बीएसएफ के डीजी ने कहा कि ड्रोन की समस्या गंभीर है। हमारे पास अभी तक इसका पुख्ता समाधान नहीं है। शुरू में ड्रोन गिराने के बाद यह पता लगाने की परेशानी थी कि इसे कहां से भेजा गया था और कहां जा रहा था। हमने जांच की तो पता चला कि ड्रोन में कंप्यूटर और मोबाइल फोन जैसे कंप्यूटेशन डिवाइस की तरह चिप्स थे। चिप्स की जांच के लिए हमने 50 लाख रुपए खर्च कर फोरेंसिक लैब बनाया। फोरेंसिक लैब में चिप्स की जांच से पता चल रहा है कि गिराए गए ड्रोन का फ्लाइट पाथ क्या था। उसे कहां से उड़ाया गया था और कहां जाना था। हमें यह भी पता चल जाता है कि उड़ान के दौरान ड्रोन को क्या संदेश दिए गए। 

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