
नई दिल्ली: भूजल और संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाले 92 देशों के करीब 1,100 वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित लोगों ने सभी सरकारों और गैर सरकारी संस्थाओं से अनुरोध किया कि वे वैश्वविक स्तर पर भूजल उपलब्धता बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाएं।
एक बयान में समूह ने कहा कि पृथ्वी का 99 प्रतिशत ताजा पानी (पीने योग्य मीठा पानी) भूजल के रूप में है। इस कारण यह पीने के पानी, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन की दिशा में बेहतर करने, जैवविविधता को बनाए रखने, धरती के ऊपर मौजूद ताजा जलस्रोतों को बनाए रखने और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अति महत्वपूर्ण है।
कई क्षेत्रों में भूजल का स्तर नीचे गिरा
समूह की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दुर्भाग्यवश कई क्षेत्रों में भूजल का स्तर या तो नीचे गिर गया है या फिर वह प्रदूषित हो गया है। इससे सामाजिक-आर्थिक विकास को नुकसान पहुंच रहा है, जल और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो रही है और हमारी पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंच रहा है।
इस समूह में शामिल और आईआईटी खड़गपुर में एसोसिएट प्रोफेसर अभिजित मुखर्जी ने मीडिया को बताया कि मानव इतिहास में इस समय हम भारत में सबसे ज्यादा भूजल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही हम अपने जीवन के आधार, तुलनात्मक रूप से एक अनवीकरणीय संसाधन को तेजी से समाप्त कर रहे हैं।
मुखर्जी और अन्य लोगों ने रेखांकित किया कि भूजल से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों को अकसर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नीतियों में जगह नहीं मिलती है।
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
(फाइल फोटो)
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