
बेंगलोर. कैफे कॉफी डे के मालिक सिद्धार्थ अचानक से लापता हो गए हैं। सोमवार 29 जुलाई को वो अपने ड्राइवर के साथ मंगलुरु के लिए निकले थे। जहां उन्होंने नेत्रावती नदी के पुल पर ड्राइवर से गाड़ी रोकने को कहा था। गाड़ी से उतरकर शाम 6:30 बजे इधर- उधर घूमने लगे। जिसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिली है। वहीं 3 दिन पहले सिद्धार्थ ने अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को एक लेटर लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा था- बतौर बिजनेसमैन वो नाकाम साबित हुए हैं। वहीं पुलिस का अंदेशा है कि सिद्धार्थ ने नदी में कूदकर सुसाइड कर लिया है।
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क्या लिखा लेटर में
37 साल की कड़ी मेहनत से हमारी कंपनी ने 30,000 नौकरियां दी और सहायक बनाए और इसके अलावा 20000 से ज्यादा नौकरियां उन आईटी कंपनी में दी, जिसमें हमारे पास सबसे ज्यादा शेयर होल्डर हैं। मेरे सर्वश्रेष्ट प्रयासों के बाद भी में एक प्रोफिटेवल बिजनेस मॉडल बनाने में नाकाम रहा।
''मैंने अपना सबकुछ दे दिया है। जिन्होंने मुझपर विश्वास किया। मैं उन सभी से माफी चाहूंगा। मैंने बहुत लंबे समय तक लड़ाई लड़ी, लेकिन अब हार गया हूं। एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर 6 महीने पुराने ट्रांजेक्शन से जुड़े मामले में शेयर वापस खरीदने का दबाव बना रहा है। मैंने दोस्त से बड़ी रकम उधार लेकर ट्रांजेक्शन पूरा किया था। दूसरे कर्जदाताओं की तरफ से भारी दबाव के कारण मैं अब पूरी तरह टूट चुका हूं। आयकर के पूर्व डीजी ने माइंड ट्री की डील रोकने के लिए दो बार हमारे शेयर अटैच किए थे। इसके बाद कैफे कॉफी डे के शेयर भी अटैच कर दिए थे। इस वजह से हमारे सामने कैश का संकट खड़ा हो गया।
'' मेरा अनुरोध है कि आप सभी मजबूती से नए मैनेजमेंट के साथ बिजनेस को आगे ले जाएं। सभी गलतियों के लिए मैं जिम्मेदार हूं। सभी फाइनेशियल ट्रांजेक्शन के लिए मैं जिम्मेदार हूं। मेरी टीम, ऑडिटर्स और सीनियर मैनेजमेंट को मेरे ट्रांजेक्शन के बारे में जानकारी नहीं है। कानून को सिर्फ मुझे जिम्मेदार ठहराना चाहिए। मैंने परिवार या किसी और को इस बारे में नहीं बताया।''
''मेरा इरादा किसी को धोखे में रखना नहीं था। बतौर बिजनेसमैन मैं असफल रहा। आशा करता हूं कि एक दिन आप मेरी बातों को समझेंगे। मुझे माफ कर देना। हमारी प्रॉपर्टी और वैल्यू की लिस्ट अटैच कर रहा हूं। हमारी प्रॉपर्टी की कीमत कर्ज की कीमत से ज्यादा है। इनसे सभी के बकायों का भुगतान हो सकता है।''
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