
NewsClick FIR copy: न्यूज वेबसाइट NewsClick के खिलाफ दर्ज कराए गए एफआईआर में बेहद संगीन आरोप लगाए गए हैं। चीनी प्रोपगैंडा को फैलाने के लिए 38 करोड़ रुपये के फंड को प्राप्त करने के आरोप में न्यूज वेबसाइट के खिलाफ ईडी जांच चल रही है। एक टीवी न्यूज चैनल ने कथित एफआईआर कॉपी में NewsClick पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बाधित करने की साजिश का आरोप लगाया गया है।
एफआईआर में न्यूजक्लिक वेबसाइट के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ, एचआर हेड अमित चक्रवर्ती के अलावा कई पत्रकारों और सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं का नाम है। इन पर भारत के खिलाफ असंतोष पैदा करने, देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता को खतरे में डालने का आरोप है।
न्यूजक्लिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर लिखा गया है कि गुप्त इनपुट प्राप्त हुए हैं कि भारत के खिलाफ काम करने के लिए भारतीय एवं विदेशी संस्थाओं द्वारा अवैध रूप से करोड़ों रुपये की विदेशी फंडिंग मिली है। धोखाधड़ी से प्राप्त फंड अप्रैल 2018 में मेसर्स पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को प्राप्त हुए हैं। यह फंड मेसर्स वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी एंड अदर्स से पांच सालों में मिले हैं। दस्तावेज में दावा किया है कि नेवि रॉय सिंघम द्वारा धोखाधड़ी से फॉरेन फंड को इन्वेस्ट किया गया है। आरोप है कि नेविल रॉय सिंघम का संबंध चीनी सरकार की मीडिया मशीनरी से है। शंघाई में रहने वाले नेविल रॉय सिंघम ने स्वयं दावा किया था कि पूरी दुनिया में उसका नेटवर्क है और इसके माध्यम से वह चीनी प्रोपगैंडा के लिए फंडिंग करता है। बीते दिनों न्यूयार्क टाइम्स ने दावा किया था कि चीनी प्रोपगैंडा के लिए गुप्त तरीके से फंडिंग तमाम संस्थाओं को भेजी गई।
सरकार की आलोचना करने और किसान आंदोलन के लिए भी फंड
एफआईआर में दर्ज किया गया है कि न्यूजक्लिक, उसके प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्था व अन्य ने भारत की एकता अखंडता और सुरक्षा को कमजोर करने की साजिश रची। इन लोगों ने भारत में किसान आंदोलन सहित अन्य विषयों के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है। एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को विवादित क्षेत्र बताते हुए साजिश रची। कोविड महामारी को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों को बदनाम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। 2019 के लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी दुबारा प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में आई। एफआईआर में Xiaomi जैसी बड़ी चीनी टेलीकॉम कंपनियों पर भारत में अवैध रूप से विदेशी फंड डालने का भी आरोप लगाया गया है।
न्यूज़क्लिक ने आरोपों को किया खारिज
न्यूज़क्लिक ने इन सभी आरोपों का दृढ़ता से खंडन किया है। न्यूज वेबसाइट ने बताया कि 2021 से उस पर रेड की जा रही है लेकिन अभी तक कोई मनी लॉन्ड्रिंग शिकायत दर्ज नहीं की गई है। प्रवर्तन निदेशालय, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और आयकर विभाग द्वारा छापे मारे गए थे लेकिन कोई सबूत नहीं मिल सके। ईडी लगातार दो साल से रेड कर रही है लेकिन अभी तक शिकायत दर्ज नहीं कर सकती है। उधर, गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत ने पुरकायस्थ और चक्रवर्ती को एफआईआर की प्रतियां प्राप्त करने की अनुमति दी। इसका दिल्ली पुलिस ने विरोध किया लेकिन कोर्ट ने नहीं माना। दरअसल, दिल्ली पुलिस द्वारा न्यूज़क्लिक कार्यालयों और वेबसाइट से जुड़े कई पत्रकारों के घरों पर छापेमारी के कुछ घंटों बाद प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को मंगलवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। दिल्ली में न्यूज़क्लिक का कार्यालय सील कर दिया गया। ईडी द्वारा न्यूजक्लिक वेबसाइट को कथित तौर पर चीन से मिले 38 करोड़ रुपये की फंड्स की जांच की जा रही है।
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