
नई दिल्ली. भारत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मसले पर फ़ैसला आ चुका है। इस फैसले के आने के बाद देश दुनिया में इसकी चर्चा थी। अब बांग्लादेश में अयोध्या मामले पर एक खबर फैलाई जा रही है। इस खबर पर सरकार ने संज्ञान लेते हुए खुद खंडन किया है। अयोध्या मामला इतदना संवेदनशील था कि खुद सरकार इससे जुड़ी फर्जी खबरों पर जवाब दे रही है।
अयोध्या मामले पर बांग्लादेश में एक लेटर वायरल हुआ। यह लेटर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई को लिखा हुआ बताया जा रहा था। इसमें नरेंद्र मोदी रंजन गोगोई को हिन्दू राष्ट्र के हित में फ़ैसला सुनाने की बधाई देते हुए दिख रहे थे। ख़त में ये भी लिखा हुआ था कि दुनिया भर के हिन्दू उनके और उनकी टीम के हमेशा आभारी रहेंगे। इस फ़ैसले से हिन्दू राष्ट्र में नया इतिहास बनेगा।
बांग्लादेशी मीडिया ने चलाई खबरें-
बांग्लादेश में कई मीडिया संस्थानों ने इस लेटर को आधिकारिक मानकर खबरों चला दीं। पर लेटर की सत्यता जानने की कोशिश नहीं की। सोशल मीडिया इस ख़त की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। खबरों में पीएम मोदी द्वारा रंजन गोगोई को मंदिर बनाने कीई साज़िश में शामिल बताया गया।
सरकार ने दी सफाई-
खबर के बहुत ज्यादा वायरल होने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस पर जवाब दिया। उन्होंने इस फर्जी ख़त को सिरे से ख़ारिज किया। इस झूठी ख़बर को फ़ैलाने वालों की भर्त्सना की।
उन्होंने प्रेस रिलीज़ ट्वीट की – “बांग्लादेश की लोकल मीडिया में एक ऐसा ख़त घूम रहा है जो कि भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा देश के चीफ़ जस्टिस को लिखा गया बताया जा रहा है। ये ख़त पूरी तरह से झूठा है और बुरी नीयत से फैलाया जा रहा है। ये बांग्लादेश के लोगों को बरगलाने और लोगों के बीच द्वेष फ़ैलाने के इरादे से चलाया जा रहा है। जो लोग इस झूठे ख़त को जान-बूझ कर फैला रहे हैं, वो भारत के बारे में सार्वजानिक जगहों पर झूठी बातें फैला रहे हैं और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिये।”
कुमार ने ये भी कहा कि भारत-बांग्लादेश के लोगों के बीच अच्छे सम्बन्धों में दरार डाले जाने की कोशिश की जा रही है।
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