
भोपाल. मध्य प्रदेश में सरकार के फ्लोर टेस्ट की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 18 मार्च की सुबह 10.30 बजे सुनवाई होगी। सोमवार को बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद 26 मार्च तक कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में 48 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट कराने के लिए याचिका दायर की थी। याचिका शिवराज सिंह चौहान की ओर से दायर की गई है। कोर्ट में भाजपा का पक्ष रखने वाले वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, कांग्रेस की ओर से कोई वकील कोर्ट में मौजूद नहीं था। इसलिए कोर्ट ने बुधवार के लिए नोटिस जारी किया।
कमलनाथ का पत्र- पहले 16 विधायकों को आजाद कराया जाए
राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित करने के लिए दुसरी बार पत्र लिखे जाने के बाद सीएम कमलनाथ ने पत्र के माध्यम से जवाब भेजा है। कमलनाथ ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है, 'अपने 40 साल के लंबे राजनैतिक जीवन में हमेशा सम्मान और मर्यादाओं का पालन किया है। 16 मार्च 2020 को मिले पत्र के बाद मैं दुःखी हूं कि आपने मेरे ऊपर संसदीय मर्यादाओं का पालन न करने का आरोप लगाया है।' सीएम कमलनाथ ने राज्यपाल के आनाकानी वाली बात पर भी जवाब देते हुए लिखा है,'मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि पिछले 15 महीनों में मैंने सदन में कई बार अपना बहुमत सिद्ध किया है। लेकिन मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि बंदी बनाए गए 16 कांग्रेसी विधायकों को स्वतंत्र होने दीजिए और 5-7 दिन खुले वातावरण में बिना किसी डर-दबाव के उनके घरों में रहने दीजिए ताकि वे स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें।
राज्यपाल ने कमलनाथ को पत्र लिख कहा था, अभिभाषण के बाद कराएं फ्लोर टेस्ट
राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार को निर्देश दिया था कि सरकार विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के तत्काल बाद फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दिया था। लेकिन अभिभाषण समाप्त होने के बाद स्पीकर ने विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।
स्पीकर के पास क्या विकल्प?
इस पूरे मामले में स्पीकर की भूमिका अहम है। स्पीकर या तो विधायकों का इस्तीफा मंजूर कर ले या फिर उन्हें अयोग्य करार दे। जैसा कर्नाटक में हुआ था। अगर स्पीकर अयोग्य करार देते हैं तो ये सीटें खाली मानी जाएंगीं और ऐसे में कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी। जिसके बाद विधानसभा सीटों की स्थिति से भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और सरकार बनाने का न्यौता मिलेगा। इन 22 सीटों पर दोबारा चुनाव होंगे। इसके अलावा स्पीकर अपने फैसले में देरी कर सकते हैं, जिससे बागी विधायकों को मनाया जा सके।
क्या है विधानसभा का समीकरण
विधानसभा की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो 230 सदस्यों मे से दो स्थान रिक्त हैं, छह विधायकों के इस्तीफे मंजूर किए जा चुके हैं। अब सदन में कांग्रेस के 108, भाजपा के 107, बसपा के दो, सपा का एक और निर्दलीय चार विधायक हैं। कांग्रेस के कुल 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था, जिसमें छह का इस्तीफा मंजूर हो चुका है अगर 16 विधायकों का भी इस्तीफा मंजूर हो जाता है तो कांग्रेस के पास 92 विधायक बचेंगे। अगर कांग्रेस को सपा, बसपा व निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल भी रहता है तो विधायक संख्या 99 ही हो पाती है।
6 विधायकों का इस्तीफा मंजूर
मध्यप्रदेश में 9 मार्च से जारी सियासी उठापटक अब बढ़ता ही जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद 22 विधायकों ने अपना इस्तीफा राजभवन और विधानसभा स्पीकर को भेजा दिया। स्पीकर एनपी प्रजापति ने 6 विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं। हालांकि अभी 16 विधायकों के इस्तीफे अभी स्वीकार नहीं किया गया है।
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