लोकपाल ने पूर्व सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच को दी क्लीन चिट, लगा था बाजार धोखाधड़ी का आरोप

Vivek Kumar   | ANI
Published : May 28, 2025, 10:49 PM IST
Former SEBI Chairperson Madhabi Puri Buch (File Photo/ANI)

सार

पूर्व सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लोकायुक्त ने खारिज कर दिया है, सबूतों के अभाव में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है।

नई दिल्ली। भारत के लोकायुक्त ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की पूर्व अध्यक्ष माधबी पुरी बुच के खिलाफ सभी तीन शिकायतों को खारिज कर दिया है। उनके खिलाफ लगे आरोपों को "झूठा, निरर्थक और राजनीति से प्रेरित" बताया है। 
शिकायतों में पूर्व सेबी प्रमुख और अडानी समूह के बीच कथित भ्रष्टाचार और लेन-देन का आरोप लगाया गया था। 

लोकायुक्त ने अपने फैसले में कहा कि उसे किसी भी "अनुचित लाभ" या "लेन-देन" का "कोई विश्वसनीय सबूत" नहीं मिला। सेबी की प्रक्रियाओं, जिनमें अडानी और अन्य से जुड़ी जांच शामिल हैं, को सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था और स्वतंत्र संस्थागत तंत्र द्वारा नियंत्रित किया गया था।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट भ्रष्टाचार के मामले का आधार नहीं

लोकायुक्त ने कहा कि पिछले निवेश और परामर्श आय का पर्याप्त रूप से खुलासा किया गया था। वे वैध थे और भ्रष्टाचार कानूनों के दायरे से बाहर थे। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को भ्रष्टाचार के मामले का आधार बनाने के लिए विश्वसनीय या पर्याप्त नहीं माना गया था। 

लोकायुक्त के आदेश में पुष्टि की गई है कि अडानी समूह से जुड़े नियामक पक्षपात के आरोप "पूरी तरह से निराधार" थे। लोकायुक्त ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट को एक "अविश्वसनीय" और "पक्षपाती" दस्तावेज के रूप में देखा। अगस्त 2024 में प्रकाशित रिपोर्ट में अमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने माधवी पुरी बुच पर हितों के टकराव का आरोप लगाया था। 

हिंडनबर्ग रिसर्च ने माधवी पुरी बुच पर लगाए थे आरोप

हिंडनबर्ग रिसर्च ने यह भी आरोप लगाया था कि सेबी की अध्यक्ष माधवी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की "अडानी मनी साइफनिंग स्कैंडल में इस्तेमाल की गई दोनों अस्पष्ट अपतटीय संस्थाओं" में हिस्सेदारी थी। सेबी की अध्यक्ष माधवी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को "झूठा, गलत, दुर्भावनापूर्ण और प्रेरित" बताया था।


अडानी समूह ने भी आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, शरारती और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के जोड़-तोड़ वाले चयन के रूप में "तथ्यों और कानून की अवहेलना के साथ व्यक्तिगत लाभ के लिए पूर्व-निर्धारित निष्कर्षों पर पहुंचने" के रूप में वर्णित किया था। यह सार्वजनिक रूप से ज्ञात है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने लोकायुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें पूर्व सेबी प्रमुख के मामले की जांच की मांग की गई थी।

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