
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने लैंगिक भेदभाव वाली बात कही है। जिसके चलते वह विवादों में फंस गए हैं। उन्होंने महिला वकीलों को सलाह दी है कि जजों को आंख मारनी चाहिए। काटजू ने कहा, "कोर्ट में जिन महिला वकीलों ने मुझे आंख मारी, उन्हें अनुकूल आदेश मिले।" बता दें कि काटजू पहले दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे। इसके बाद 2006 से 2011 तक सुप्रीम कोर्ट में जज रहे। वे 2011 से 2014 तक भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष भी रहे थे।
काटजू ने अपनी तरफ से ये बातें मजाक में कहीं, लेकिन सोशल मीडिया पर इसको लेकर बवाल मच गया। लोगों ने कहा कि यह एक सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के न्यायिक आचरण के मानक के अनुसार नहीं है। रिटायर होने के बाद भी एक जज को उस पद का मान रखना चाहिए, जिसपर वह कभी थे। आलोचकों ने कहा कि यह कहना कि महिला वकील द्वारा पलक झपकाने से फैसले बदल सकते हैं, न्यायिक ईमानदारी के मूल विचार पर कलंक लगाता है। यह हर युवा महिला को बताता है कि आप पलक झपकते ही तरक्की की सीढ़ी चढ़ सकती हैं, खासकर कानूनी व्यवस्था में।
कई वकीलों और यूजर्स ने काटजू के इस बयान को "न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक" बताया है। एक वकील ने ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "यह ट्वीट अब हटा दिया गया है। उनके द्वारा पारित सभी आदेशों की फिर से समीक्षा की जानी चाहिए।" विवाद बढ़ने पर काटजू ने पोस्ट हटा दिया। इसके बाद भी इसके स्क्रीनशॉट शेयर किए जा रहे हैं।
बता दें कि 2011 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए जस्टिस काटजू का विवादों से नाता रहा है। वे राजनीति, कविता और दर्शन पर अपनी तीखी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। अक्सर उर्दू शेरों और व्यक्तिगत किस्सों के साथ अपनी टिप्पणियां करते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थिति को उनकी तीखी और कभी-कभी भड़काऊ टिप्पणियों के लिए बार-बार आलोचना का सामना करना पड़ा है।
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