
नई दिल्ली. कोरोना काल में भारतीय अर्थव्यवस्था में आई गिरावट पर पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि 4 दशकों में 2020-21 अर्थ व्यवस्था का सबसे काला वर्ष रहा है। सबसे ज़्यादा चिंता की बात ये है कि प्रति व्यक्ति जीडीपी एक लाख रुपये के नीचे गिर गया है, ये गिरकर 99,694 हो गया है। पिछले साल की तुलना में ये -8.2% की गिरावट है। बता दें कि कोरोना महामारी के चलते वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। केंद्र सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक, जीडीपी ग्रोथ रेट -7.3% फीसदी रही। हालांकि, चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में जीडीपी ग्रोथ रेट 1.6 फीसदी दर्ज की गई।
चौथी तिमाही में ग्रोथ रेट 1.6 फीसदी
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी ग्रोथ रेट -7.3% रही। हालांकि, कोरोना के चलते सरकार ने पहले ही जीडीपी में 8 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था। यानी सरकार के अनुमान से बेहतर आंकड़े सामने आए हैं। कोरोना संकट के बावजूद स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है।
चौथी तिमाही में ग्रोथ रेट 1.6 फीसदी
चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 1.6 फीसदी है। हालांकि, कोरोना की दूसरी लहर का असर अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ा, इसकी जानकारी जून तिमाही के जीडीपी के आंकड़े सामने आने के बाद पता चलेगा। इससे पहले कोरोना की पहली लहर और लॉकडाउन के चलते देश मंदी के दौर में था। लगातार दो तिमाहियों में जीडीपी में नेगेटिव ग्रोथ थी। यहां तक की जून की तिमाही में तो जीडीपी करीब 24 फीसदी के ऐतिहासिक गिरावट बिंदु तक पहुंच गई थी। हालांकि, जुलाई-सितंबर तिमाही में यह सुधरकर -7.5 फीसदी रही थी। जबकि दिसंबर की तिमाही में 0.4 फीसदी की मामूली बढ़त हुई थी।
सरकार ने फरवरी में ही अनुमान जारी कर बताया था कि वित्त वर्ष 2020-21 की जीडीपी में 8 फीसदी की गिरावट आ सकती है। इसके अलावा रेटिंग एजेंसी ICRA ने अनुमान लगाया था कि पूरे वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.3 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया था। यह आंकड़ा बिल्कुल सही निकला।
National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.