मनरेगा की जगह केंद्र सरकार ला रही नई योजना, कांग्रेस ने पूछा-बापू से क्यों है दिक्कत?

Published : Dec 15, 2025, 04:01 PM IST
MNREGA

सार

केंद्र सरकार मनरेगा की जगह 'विकसित भारत जी राम जी' बिल पेश करने जा रही है। इस बिल में प्रस्ताव है कि 100 की जगह 125 दिन काम की गारंटी दी जाएगा। हालांकि, कांग्रेस ने महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। 

नई दिल्ली। संसद के चालू शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने एक बिल पेश किया है, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह लेगा। इस नए बिल का नाम 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' है, जिसे शॉर्ट में विकसित भारत जी राम जी (VB G RAM G) कहा जा रहा है। बिल की कॉपी सोमवार को लोकसभा सांसदों के बीच सर्कुलेट की गई है। इसके लिए एक व्हिप जारी किया गया है। साथ ही बीजेपी सांसदों को बिल पास कराने के लिए संसद में मौजूद रहने को कहा गया है।

मनरेगा को रिप्लेस करने वाले नए बिल में क्या?

  • नया बिल 100 दिनों की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव करता है। इसमें यह भी प्रस्ताव है कि काम पूरा होने के एक हफ्ते या 15 दिनों के भीतर पेमेंट किया जाए। अगर तय समय सीमा के भीतर पेमेंट नहीं किया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है।
  • नया बिल प्रस्ताव करता है कि योजना के तहत काम को 4 कैटेगरी जल सुरक्षा, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका इंफ्रास्ट्रक्चर और आपदा से निपटने की क्षमता में बांटा जाएगा। ऐसा काम खेती के पीक सीजन के दौरान नहीं किया जाएगा, जब ग्रामीण इलाकों के लोग व्यस्त रहते हैं।
  • पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, बायोमेट्रिक्स और जियोटैगिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें विभिन्न स्तरों पर शिकायत निवारण का भी प्रावधान है।
  • पहले पूरा खर्च केंद्र उठाता था, वहीं अब राज्यों को भी 10 से 40% तक पैसा देना होगा।

केंद्र और राज्य सरकारें कितना-कितना खर्च करेंगी?

'विकसित भारत जी राम जी योजना' के तहत, केंद्र और ज्यादातर राज्य खर्च 60:40 के अनुपात में शेयर करेंगे। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 होगा और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत होगा। सालाना 1.51 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित खर्च में से केंद्र 95,692 करोड़ रुपये देगा। बता दें कि हाल ही में 12 दिसंबर को खबर आई थी कि केंद्रीय कैबिनेट ने मनरेगा का नाम बदलकर 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना रखा' है। हालांकि, सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन सामने नहीं आया था।

नया बिल विकसित भारत 2047 के विजन को करेगा पूरा

सरकार के मुताबिक, नया बिल विकसित भारत 2047 के विजन को पूरा करने के लिए एक नया फ्रेमवर्क पेश करता है। मनरेगा योजना, जिसे तत्कालीन UPA सरकार ने 2005 में लॉन्च किया था, ग्रामीण इलाकों में 100 दिनों के काम की गारंटी देती है और पिछले दो दशकों में यह गेम-चेंजर साबित हुई है।

बीजेपी महात्मा गांधी का नाम क्यों हटा रही?

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलने के पीछे के मकसद पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "वे महात्मा गांधी का नाम क्यों हटा रहे हैं? उन्हें सबसे बड़ा भारतीय नेता माना जाता है। जब भी ऐसा नाम बदला जाता है, स्टेशनरी और कागज के काम में बहुत खर्च होता है।" उन्होंने कहा, "मुझे समझ नहीं आ रहा कि मकसद क्या है। संसद काम नहीं कर रही है। हम जरूरी मुद्दों पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। समय और जनता का पैसा बर्बाद हो रहा है।"

पहले नेहरू-इंदिरा से दिक्कत थी, अब बापू से भी

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि बीजेपी को पहले जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से दिक्कत थी। "अब देश देख रहा है कि उन्हें बापू से दिक्कत है। आप MGNREGA के तहत राज्यों को समय पर पेमेंट सुनिश्चित करें। आप 100 से 150 दिन बढ़ाएं और योजना में सुधार करें। यह शर्म की बात है कि सरकार सिर्फ नाम बदलने पर ध्यान दे रही है।

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