
हरिद्वार. पिछले दिनों यहां आयोजित धर्म संसद (Dharma Sansad) में विवादास्पद टिप्पणी मामले की एक स्वतंत्र जांच(independent inquiry) की मांग को लेकर दायर याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट करेगी। SC ने याचिका स्वीकार कर ली है।
धर्म विशेष के खिलाफ भड़काऊ भाषण का आरोप
हरिद्वार के खड़खड़ स्थित वेद निकेतन में 17 से 19 दिसंबर तक धर्मसंसद का आयोजन किया गया था। आरोप है कि इसमें कुछ लोगों ने हेट स्पीच (Hate Speach) दी थी। इनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके बाद ज्वालापुर निवासी गुलबहार कुरैशी की शिकायत पर पुलिस ने यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने का मामला दर्ज कराया था। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार के मुताबिक, फआईआर में वसीम रिजवी (अब जितेंद्र त्यागी) यती नरसिंहानंद, अन्नपूर्णा का नाम शामिल है। यह FIR थाना ज्वालापुर पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई है।
सीएम धामी को खुली चुनौती
इस मामले को लेकर पिछले दिनों हरिद्वार के भूपतवाला स्थित शाम्भवी धाम आश्रम में धर्म संसद कोर कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें हेट स्पीच को लेकर संतों पर दर्ज हो रहे मुकदमों और SIT के गठन पर निर्णय लिया गया कि 16 जनवरी को धर्म संसद से जुड़े संतों द्वारा एक प्रतिकार(विरोध) सभा आयोजित की जाएगी। इसमें उत्तराखंड सहित देशभर से साधु-संतों को बुलाया गया है। इस सभा में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चुनौती दी गई। शाम्भवी धाम के पीठाधीश्वर आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री साधु-संतों को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं।
यह भी जानें
धर्म ससंद में कथिततौर पर हेट स्पीच को लेकर भारतीय दंड संहिता की जिस धारा 153ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह एक गैर जमानती धारा है। इस मामले को आज वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में रखा। सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि सत्यमेव जयते की जगह अब शस्त्रमेव जयते की बातें हो रही हैं। सिब्बल ने कहा कि FIR तो दर्ज हुईं, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। इस पर चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने मामले पर सुनवाई का आश्वासन दिया।
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