हरियाणा: कांडा समेत ये बागी विधायक भाजपा के लिए बनेंगे सत्ता की चाबी; दो को बुलाया गया दिल्ली

Published : Oct 24, 2019, 11:52 PM IST
हरियाणा: कांडा समेत ये बागी विधायक भाजपा के लिए बनेंगे सत्ता की चाबी; दो को बुलाया गया दिल्ली

सार

हरियाणा में भाजपा पिछले विधानसभा और 2019 लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन नहीं दोहरा पाई। 90 सीटों वाले राज्य में भाजपा को कांग्रेस ने कड़ी टक्कर दी। भाजपा 40 सीटें जीत पाई।

चंडीगढ़. हरियाणा में भाजपा पिछले विधानसभा और 2019 लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन नहीं दोहरा पाई। 90 सीटों वाले राज्य में भाजपा को कांग्रेस ने कड़ी टक्कर दी। भाजपा 40 सीटें जीत पाई। वहीं, पिछली बार 15 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने 32 पर हासिल की। भाजपा बहुमत के आंकड़े से 6 सीटें दूर रह गई। दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी को 10 और निर्दलियों को 9 पर जीत मिली। ऐसे में भाजपा की निगाहें निर्दलियों पर टिकी हैं। इनमें से ज्यादातर भाजपा के दागी ही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने हरियाणा जनहित पार्टी से जीते गोपाल कांडा और रानिया सीट से निर्दलीय विधायक रंजीत सिंह चौटाला को चार्टर प्लेन से दिल्ली बुलाया है। दोनों नेता भाजपा को समर्थन देने के संकेत भी दे चुके हैं। रंजीत सिंह कांग्रेस के बागी हैं।

ज्यादातर निर्दलीय भाजपा को समर्थन देने के लिए तैयार
भाजपा की सरकार बनने में पूर्व कांग्रेसी मंत्री कांडा अहम भूमिका निभा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ज्यादातर निर्दलीय उनके संपर्क में हैं और भाजपा को समर्थन देने के लिए तैयार भी हैं।

हुड्डा सरकार में मंत्री रहे हैं कांडा
गोपाल कांडा अपनी हरियाणा लोकहित पार्टी से सिरसा विधानसभा सीट से जीते हैं। वे कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ थे और हुड्डा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे, लेकिन विवादों में नाम आने के बाद उन्हें कांग्रेस से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई।

भाजपा के बागी फिर दे सकते हैं समर्थन
भाजपा जिन 6 विधायकों के दम पर सत्ता में काबिज होने का सपना देख रही है, उनमें से चार पार्टी के ही बागी हैं। इन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया था। 
 
1- नयन पाल रावत (पृथला सीट से जीते)
फरीदाबाद की पृथला सीट से निर्दलीय नयन पाल रावत ने 16429 वोटों से जीत हासिल की है। 2014 में नयन पाल रावत ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और हार गए थे। इस बार भाजपा से टिकट ना मिलने पर वे नाराज होकर निर्दलीय लड़े थे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी टेकचंद शर्मा को मात दी।

2- सोमबीर सांगवान (दादरी से बबीता फोगाट को हराया)
निर्दलीय सोमबीर सांगवान ने दादरी विधानसभा सीट से 14080 वोटों ने जीत दर्ज की है। भाजपा में टिकट ना मिलने के बाद सोमबीर सांगवान निर्दलीय मैदान में उतरे थे। 2014 में सोमबीर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इस बार के चुनाव में बीजेपी ने सोमबीर सांगवान की जगह बबीता फोगाट को उतारा था, वे तीसरे नंबर पर रहीं।

3-  बलराज कुंडू 
बलराज कुंडू महम सीट से भाजपा से टिकट मांग रहे थे। भाजपा से टिकट ना मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। कुंडू ने भाजपा के शमशेर खरकड़ा को हराया। 

4- पुंडरी: रणधीर सिंह गोलन
रणधीर सिंह गोलन भी टिकट ना मिलने से पुंडरी विधानसभा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतरे थे। गोलन ने 2014 में भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 

5- बादशाहपुर
बादशाहपुर विधानसभा सीट पर निर्दलीय राकेश दौलताबाद ने जीत दर्ज की है। वे इस सीट से दूसरी बार निर्दलीय के तौर पर उतरे थे।

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