
पंचकूला (हरियाणा) [भारत], 3 जुलाई (एएनआई): पंचकूला की एक विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को कथित हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB)-IDFC फर्स्ट बैंक वित्तीय अनियमितता मामले में तत्कालीन हरियाणा चुनाव आयोग के मुख्य लेखा अधिकारी प्रवीण कुमार को तीन दिन की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की हिरासत में भेज दिया है। सीबीआई ने चार दिन की हिरासत में पूछताछ की मांग की थी, लेकिन अदालत ने तीन दिन की रिमांड की इजाजत दी।
सीबीआई के रिमांड आवेदन के अनुसार, कुमार ने कथित तौर पर निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर सरकारी धन का निवेश करने, बिना उचित प्राधिकरण के बैंक खाता खोलने और शेल कंपनियों को धन डायवर्ट करने की साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि कुमार ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में वरिष्ठ लेखा अधिकारी और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में कार्य किया था। उनके कार्यकाल के दौरान, IDFC फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा में एक खाता खोला गया था, जिससे एजेंसी ने सरकारी खजाने को 169 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप लगाया है। इस राशि में से लगभग 110 करोड़ रुपये कथित तौर पर कुमार के कार्यकाल के दौरान धोखाधड़ी से निकाले गए थे।
सीबीआई ने आगे दावा किया कि IDFC फर्स्ट बैंक में HSPCB का खाता सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना खोला गया था और खाता खोलने वाले फॉर्म (AOF) पर कुमार के हस्ताक्षर थे। यह भी आरोप लगाया गया कि जांच के दौरान खाते को अधिकृत करने वाला कोई विभागीय अनुमोदन या आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला है।
एजेंसी ने दावा किया कि हरियाणा वित्त विभाग के निवेश दिशानिर्देशों से अवगत होने के बावजूद, आरोपी ने उनका पालन नहीं किया। उसने आगे दावा किया कि फर्जी चेकों के माध्यम से सरकारी धन को कई शेल कंपनियों में स्थानांतरित किया गया था।
सीबीआई के अनुसार, जांच में अब तक डायवर्ट किए गए धन के प्राप्तकर्ताओं के रूप में CAPCO फिनटेक, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, एएस बुलियन ट्रेडर्स, दिशा ट्रेडर्स, भारत सोलर, मन्नत कॉन्ट्रैक्टर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुज जैसी संस्थाओं की पहचान हुई है।
सीबीआई ने कहा कि कुमार को 2 जुलाई को उसके चंडीगढ़ कार्यालय में गिरफ्तार किया गया था।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी का दस्तावेजी और डिजिटल सबूतों से सामना कराने, बैंक लेनदेन के पूरे ट्रेल का पता लगाने, डायवर्ट किए गए सरकारी धन के अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने, कथित अवैध वित्तीय लाभ और संपत्तियों का पता लगाने और अन्य सरकारी अधिकारियों व निजी व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक थी।
सीबीआई ने यह भी दलील दी कि कुमार पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं कर रहे थे और संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे थे। इसने यह भी आशंका व्यक्त की कि यदि पुलिस हिरासत में नहीं रखा गया, तो आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है या सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। (एएनआई)
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