
उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट क्षेत्र में रहने वाले कुछ मलयाली लोगों ने चेंडा मेलम समूह बनाया है। इसके मदद से वे केरल की संस्कृति से अपना जुड़ाव बनाए हुए है। इस समूह में आईटी क्षेत्र में काम करने वाले संजीथ नायर शामिल हैं। वह पेशेवर तालवादक हैं। संजीथ पीए-एनजे (पेंसिल्वेनिया-न्यू जर्सी) वाध्या वेधी के प्रमुख संरक्षक और शिक्षक हैं।
संजीथ नायर ने कहा कि चेंडा मेलम के लिए हममें से कुछ ने पूरे सम्मान और समर्पण के साथ वाद्य यंत्र बजाना सीखा है। समूह के सदस्यों ने त्रिशूर के कलामंडलम शिवदास आशान से ट्रेनिंग ली है। समूह में शामिल लोग घंटों अभ्यास करते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारे हाथों में कितना दर्द होता है। हम पूरी तल्लीनता से अभ्यास करते हैं।
संजीथ के चेंडा मेलम की अमेरिका में खूब चर्चा हो रही है। इन्हें न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास में केरल पिरावी समारोह में प्रदर्शन के लिए बुलाया गया था। न्यूयॉर्क में आईटी पेशेवर के रूप में काम करने वाले
वलसन वेल्लालथ ने कहा कि मैं त्रिशूर से हूं। मैंने बचपन में चेंडा मेलम अनगिनत बार देखा था। मुझे अपनी जड़ों से फिर से जुड़ने की जरूरत थी। चेंडा मेलम में शामिल होना मेरे लिए एक सपना सच होना था। अमेरिका में लोग बड़े उत्साह से हमारे चेंडा मेलम के प्रदर्शन को देखते हैं। लोग आते हैं और पूछते हैं और क्या हम नए सदस्यों को स्वीकार करेंगे। यह देखना हमारे लिए बहुत उत्साहजनक है कि छोटे बच्चे भी चेंडा सीखना चाहते हैं।
एक ब्रांड मैनेजमेंट कंपनी के सीनियर डायरेक्टर प्रेम रामचंद्रन ने कहा कि मैं केरल से हूं। अमेरिका आने के बाद से खुद को अपनी जड़ों से कटा महसूस कर रहा था। अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए मैं चेंडा मेलम समूह में शामिल हुआ। इसके लिए काफी कड़ी ट्रेनिंग की जरूरत होती है। समूह के सदस्यों के साथ परफॉर्म करना मेरे लिए शानदार अनुभव है। कई बार दर्शक मंत्रमुग्ध रह जाते थे। वे हर ताल पर तालियां बजाते हैं।
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