3 कॉरिडोर, 57 स्टेशन…और अब 20 ट्रांसजेंडर गार्ड्स! हैदराबाद मेट्रो की इस पहल में क्या है खास?

Published : Dec 02, 2025, 10:13 AM IST
hyderabad metro transgender security staff inclusion

सार

हैदराबाद मेट्रो ने अपनी सिक्योरिटी टीम में 20 ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को शामिल किया है। यह कदम महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने, इनक्लूसिविटी को मजबूत करने और तेलंगाना सरकार की सामाजिक सशक्तिकरण नीति को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। 

Hyderabad Metro News: हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड (HMRL) ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। मेट्रो ने अपनी फ्रंटलाइन सिक्योरिटी टीम में 20 ट्रांसजेंडर सिक्योरिटी कर्मियों को शामिल किया है। यह सिर्फ एक नई भर्तियों की बात नहीं है, बल्कि सोशल एम्पावरमेंट, सुरक्षा और इनक्लूज़न की एक बड़ी शुरुआत है।

देश की सबसे एडवांस्ड अर्बन ट्रांजिट सिस्टम है HMRL

हैदराबाद मेट्रो भारत के सबसे एडवांस्ड अर्बन ट्रांजिट सिस्टम में से एक है। 57 स्टेशनों वाले तीन बड़े कॉरिडोर और करीब 5 लाख रोज़ाना पैसेंजर-यह सिस्टम शहर की लाइफलाइन माना जाता है। इनमें से लगभग 30% महिलाएं रोज़ मेट्रो से सफर करती हैं, इसलिए पैसेंजर सिक्योरिटी HMRL की सबसे बड़ी प्रायोरिटी बनती है। ट्रांसजेंडर सिक्योरिटी स्टाफ की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्होंने सोमवार से चुने हुए स्टेशनों पर जिम्मेदारी संभाल ली है। यह पहल सीधे तेलंगाना सरकार की उस नीति से जुड़ी है जिसमें पिछड़े और ट्रांसजेंडर समुदाय को बराबर मौके देने का वादा किया गया था।

आखिर हैदराबाद मेट्रो को ट्रांसजेंडर सिक्योरिटी की जरूरत क्यों पड़ी?

सवाल उठता है: इतने बड़े और हाई-टेक ट्रांजिट सिस्टम को ट्रांसजेंडर सुरक्षा कर्मियों की जरूरत क्यों? इसके जवाब में मेट्रो प्रबंधन ने कहा कि ऐसा माहौल बनाना है, जहां हर व्यक्ति सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। महिला यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना इसका एक बड़ा उद्देश्य है। ट्रांसजेंडर सिक्योरिटी स्टाफ की मौजूदगी से स्टेशन और कोच में एक भरोसे का माहौल बनेगा, खासकर रात के समय और भीड़भाड़ के दौरान।

क्या नए ट्रांसजेंडर सिक्योरिटी कर्मियों की जिम्मेदारी सिर्फ सुरक्षा तक ही सीमित है?

नहीं। इन 20 सिक्योरिटी कर्मियों की भूमिका काफी व्यापक है। वे महिलाओं के कोच और मुख्य जगहों पर सक्रिय सुरक्षा बनाए रखेंगे। साथ ही पैसेंजर को रास्ता, जानकारी और गाइडेंस देंगे, कॉनकोर्स लेवल पर मूवमेंट को आसान बनाएंगे। इसके अलावा बैगेज स्कैनर और स्टेशन सिक्योरिटी सिस्टम में मदद और स्टेशन के पूरे एरिया में एक “दिखने वाली और भरोसा दिलाने वाली” उपस्थिति देंगे। इससे कई पैसेंजर, खासकर महिलाएं, खुद को ज्यादा सुरक्षित और कम्फर्टेबल महसूस करेंगी।

 ट्रांसजेंडर समुदाय को इससे क्या लाभ होगा?

हां, बिल्कुल। यह कदम सिर्फ एक जॉब अपॉर्च्युनिटी नहीं है, बल्कि समाज के उस वर्ग को पहचान देने की शुरुआत है जो लंबे समय से मुख्यधारा से दूर रहा है। पहले भी तेलंगाना सरकार ने ट्रांसजेंडर लोगों को असिस्टेंट ट्रैफिक मार्शल जैसी भूमिकाओं में शामिल किया था। अब हैदराबाद मेट्रो का यह फैसला उन्हें पब्लिक सर्विस में एक और मजबूत जगह देता है।

क्या इस पहल से मेट्रो का सुरक्षा ढांचा बदलने वाला है?

HMRL के मैनेजिंग डायरेक्टर सरफराज अहमद ने खुद कहा है कि ये 20 नए कर्मचारी सिर्फ सुरक्षा नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि समाज में एक बड़ा संदेश भी देंगे। उनकी मौजूदगी फ्रंटलाइन सर्विस को मजबूत करेगी, यात्री अनुभव बेहतर बनाएगी औरमहिलाओं की सुरक्षा बढ़ाएगी। साथ ही मेट्रो को एक इनक्लूसिव, सम्मानजनक और सुरक्षित स्पेस बनाएगी

 

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