
नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कोर कमांडर स्तर की बातचीत में सहमति बन गई है। इस महीने की 25 तारीख को चुशुल-मोल्डो बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर हुई बैठक में मौजूदा हालात का जायजा लेने के बाद यह फैसला लिया गया। बैठक में संवेदनशील इलाकों में टकराव टालने के तरीकों, सीमा से सैनिकों की वापसी और गश्त की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। 2020 की गलवान झड़प के बाद तनाव कम करने के लिए दोनों देशों ने सैन्य बातचीत जारी रखने का भी फैसला किया है। दोनों देशों के नेताओं के रुख के मुताबिक, सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर भी सहमति बनी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इससे लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सामान्य जीवन बहाल करने में मदद मिलेगी।
भारत और चीन के बीच रिश्ते बिगड़े हुए लगभग पांच साल हो गए हैं। सीमा विवाद से शुरू हुई तनातनी बाद में राजनयिक स्तर तक पहुंच गई, जिससे दोनों देशों के रिश्ते सबसे खराब दौर में थे। लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी के फैसलों और धमकियों से दुनिया के समीकरण बदल रहे हैं। इसी कड़ी में सबसे नया मामला भारत और चीन के रिश्तों का फिर से 'भाई-भाई' जैसा होना है। पांच साल बाद, पिछले दिनों दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू की गईं। इसके बाद अब सीमा पर तनाव में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
इससे संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के रिश्ते सामान्य हो रहे हैं। 2020 में बंद की गईं उड़ानें पिछले दिनों फिर से शुरू की गईं। उम्मीद है कि गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद बिगड़े रिश्ते अब सुधर जाएंगे। शंघाई शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में भारत-चीन राजनयिक संबंधों को मजबूत करना एक अहम मुद्दा था। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि उड़ानें फिर से शुरू होने से दोनों देशों के नागरिकों के बीच रिश्ते मजबूत होंगे और सहयोग बढ़ेगा। इसके बाद, भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता के लिए कोर कमांडर स्तर की बातचीत में बनी सहमति भी एक बड़ी उम्मीद जगाती है।
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