चीनी सेना बोली- भारत के क्षेत्र में 15-20km तक बने बफर जोन, इंडियन आर्मी का जवाब- बहाल रहेगी अप्रैल 2020 से पहले वाली स्थिति

Published : May 24, 2023, 02:23 PM ISTUpdated : May 24, 2023, 02:30 PM IST
PLA

सार

भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें देपसांग और डेमचोक में 15-20km का बफर जोन बनाने की मांग की गई थी। इंडियन आर्मी ने कहा है कि अप्रैल 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल रहेगी।

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा पर विवाद (India China Border Dispute) चल रहा है। इस दौरान दोनों सेनाओं के बीच बातचीत भी हो रही है। ऐसी खबरें आई कि चीनी सेना ने मांग किया है कि पूर्वी लद्धाख के दो फ्रिक्शन प्वाइंट (ऐसी जगह जहां संघर्ष की स्थिति हो) पर भारत के क्षेत्र में 15-20 किलोमीटर का बफर जोन बनाया जाए। वे उस इलाके में बफर जोन बनाना चाहते हैं, जिसे भारत अपना मानता है। इंडियन आर्मी ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा है कि अप्रैल 2020 तक जो स्थिति थी वही बहाल रहेगी।

ये दो फ्रिक्शन प्वाइंट देपसांग और डेमचोक हैं। यहां चीन और भारत की सेना के बीच गतिरोध जारी है। भारतीय सेना ने देपसांग और डेमचोक में पारंपरिक बिंदुओं (उस जगह तक जहां सेना अप्रैल 2020 तक गश्त करती थी) पर गश्त के अधिकारों को बहाल करने के लिए दृढ़ नीति अपनाई है।

भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच हो रही बातचीत

सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों की वापसी के मुद्दे पर भारत और चीन की सेना के बीच कई राउंड की बैठक हुई है। इस संबंध में राजनयिक स्तर पर भी बात हुई है। भारतीय सेना का कहना है कि पारंपरिक गश्त बिंदुओं तक गश्त करना उसका अधिकार है।

23 अप्रैल को भारत और चीन के वरिष्ठ सर्वोच्च सैन्य कमांडर स्तर की 18वें दौर की बातचीत हुई थी। चुशुल-मोल्दो मीटिंग प्वाइंट पर हुई बैठक में देपसांग और डेमचोक से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई थी। अब तक गलवान, पैंगोंग त्सो झील के उत्तर और दक्षिण किनारे, गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स से सैनिकों की वापसी हुई है। सूत्रों ने कहा कि इन बिंदुओं पर पीछे हटने की प्रक्रिया वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत के दावे को नहीं बदलती है।

रणनीतिक रूप से अहम है डेपसांग

डेपसांग चीन और भारत दोनों के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। चीनी सैनिकों ने जानबूझकर पीपी 10, 11, 11ए, 12 और 13 तक गश्त कर रहे भारतीय सैनिकों को रोक दिया है। इस इलाके में पीछे हटने का मतलब है कि 952-वर्ग किमी क्षेत्र पहुंच से बाहर हो जाएगी। अक्साई चिन देपसांग के पूर्व में है, जबकि सियाचिन ग्लेशियर उत्तर-पश्चिमी किनारे पर है। चीन ने 1962 से 38,000 वर्गमीटर के क्षेत्र अक्साई चिन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।

डेमचोक में चीनियों ने गाड़े हैं तीन तंबू

डेमचोक के चार्डिंग निंगलुंग नाला पर भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। चीनियों ने इलाके में तीन तंबू गाड़े हैं। LAC चारडिंग निंगलुंग नाले से होकर गुजरती है। पूर्वी लद्दाख सेक्टर में भारत चीन सीमा की लंबाई 832 किलोमीटर है। दोनों ओर से करीब 50 हजार सैनिकों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही लड़ाकू विमानों, लंबी दूरी तक मार करने वाले तोप, टैंक और मिसाइल भी तैनात किए गए हैं। मई 2020 से इस इलाके में तनाव है।

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