चीन को चुनौती देने के लिए भारत की मदद करना अमेरिका-जापान की मजबूरी, इंडिया से ही काबू में रहेगा ड्रैगन

Published : Aug 27, 2022, 09:48 PM IST
चीन को चुनौती देने के लिए भारत की मदद करना अमेरिका-जापान की मजबूरी, इंडिया से ही काबू में रहेगा ड्रैगन

सार

भारत के उत्तराखंड में अमेरिका-भारत के सयुक्त अभ्यास में थोड़ा फेरबदल किया गया है। इस साल का अभ्यास उत्तराखंड के औली क्षेत्र में 3,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर होगा। यह क्षेत्र वास्तविक नियंत्रण रेखा से 100 किमी से भी कम दूरी पर है। युद्ध अभ्यास 18 से 31 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा।

तोक्यो। चीन (China) को मात देने के लिए भारत-अमेरिका (India-US) की नजदीकियां बढ़ सकती हैं। अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने भी इसके संकेत दिए हैं। अमेरिका के नौसेना संचालन प्रमुख एडम माइक गिल्डे ने कहा कि चीन का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाते हुए भारत भविष्य में अमेरिका का अहम साझेदार हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत, चीन से दो फ्रंट पर मोर्चा लिए हुए है। अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत में अब अन्य देशों की अपेक्षा अधिक समय देना होगा क्योंकि यह हमारा भविष्य का स्ट्रैटेजिक पार्टनर है।

निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के सर्वोच्च रैंक वाले नौसेना अधिकारी गिल्डे ने गुरुवार को वाशिंगटन में हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक व्यक्तिगत संगोष्ठी में कहा कि वे अब चीन को न केवल दक्षिण चीन सागर और ताइवान स्ट्रेट के लिए देख रहे हैं बल्कि अब भारत के साथ भी उसकी गतिविधियों को देखने की जरुरत है। क्योंकि भारत चीन के खिलाफ दो फ्रंट पर कमान संभाले हुए है। 

पिछले अक्टूबर में अपनी पांच दिवसीय भारत यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिंद महासागर युद्धक्षेत्र हमारे लिए तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। तथ्य यह है कि भारत और चीन के बीच वर्तमान में उनकी सीमा पर थोड़ी झड़प है। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच महाशक्तियों की टकराहट है। इसमें अमेरिका को सबसे विश्वसनीय पार्टनर भारत ही लग रहा है।

अमेरिका कई मोर्चे पर चाहता है चीन उलझा रहे

निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, जून में जब क्वाड के नेता - अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया - जापान में मीटिंग कर रहे थे तो चीन के साम्राज्य को चुनौती देने के लिए कई मोर्चे पर फ्रंट खोलने की भी रणनीति बनी थी। पेंटागन के पूर्व अधिकारी एलब्रिज कोल्बी ने निक्केई एशिया को बताया कि भारत ताइवान पर स्थानीय लड़ाई में सीधे योगदान नहीं देगा लेकिन यह हो सकता है चीन का ध्यान हिमालय की सीमा की ओर आकर्षित करें। इससे चीन कई मोर्चों पर उलझेगा। यूएस पूर्व प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के 2018 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति के प्रमुख लेखक कोल्बी ने बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान को भारत की जरूरत है। क्योंकि अगर भारत दक्षिण एशिया में अधिक मजबूत होगा तो वह चीन को अपने दोनों फ्रंट पर चुनौती बनेगा इससे ड्रैगन को समस्या होगी। 

भारत-अमेरिका का युद्धाभ्यास रणनीति का हिस्सा

अमेरिका और भारत के बीच अक्टूबर महीने में एक संयुक्त युद्धाभ्यास प्रस्तावित है। इस माउंटेनटॉप एक्सरसाइज को चीन के लिए दूसरे मोर्चे को रेखांकित करने के रूप में देखा जा रहा है। निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध अभ्यास दक्षिण एशियाई देश के उत्तराखंड राज्य में 18 से 31 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। भारत ने तीन बार ऐसा युद्धाभ्यास किया है। भारत ने 2014, 2016 और 2018 में उत्तराखंड में ऐसा स्ट्रैटेजिक युद्धाभ्यास किया है। यह सभी अभ्यास चीन की सीमा से 300 किमी से अधिक तलहटी में आयोजित किए गए थे।

इस बार थोड़ा अलग होगा युद्धाभ्यास

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के उत्तराखंड में अमेरिका-भारत के सयुक्त अभ्यास में थोड़ा फेरबदल किया गया है। इस साल का अभ्यास उत्तराखंड के औली क्षेत्र में 3,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर होगा। यह क्षेत्र वास्तविक नियंत्रण रेखा से 100 किमी से भी कम दूरी पर है।

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