
नई दिल्ली. 2020-2021 के दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकडे़ आ गए हैं। इस (जुलाई सितंबर तिमाही में) जीडीपी में 7.5 की गिरावट दर्ज की गई है। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9% की गिरावट दर्ज हुई थी। वहीं, इस बार 10.7% गिरावट की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, अनुमान गलत साबित हुए।
पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी में 4.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं, इस साल लगातार दूसरी तिमाही में निगेटिव ग्रोथ आई है। इसे तकनीकी तौर पर मंदी माना जा रहा है। वहीं, सरकार ने भी इसे स्वीकार कर लिया है। अर्थव्यवस्था में अगर जीडीपी लगातार दो तिमाही निगेटिव में रहती है तो इसे मंदी की हालत ही माना जाता है।
8 सेक्टरों में आई गिरावट
अक्टूबर में 8 प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में 2.5 फीसदी की गिरावट आई है। कोयला, कच्चा तेल, उर्वरक, स्टील, पेट्रो रिफाइनिंग, बिजली और नेचुरल गैस उद्योगों को किसी अर्थव्यवस्था की बुनियाद माना जाता है। इन्हीं 8 सेक्टरों को कोर सेक्टर माना जाता है।
इस तिमाही में खुल गई थी अर्थव्यवस्था
पहली तिमाही के दो महीनों अप्रैल और मई में देश में पूरी तरह से लॉकडाउन था। हालांकि, मई के बाद से आर्थिक गतिविधियां शुरू होने लगी थीं। जबकि दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खुल गई थी।
किसने कितनी गिरावट का अनुमान जताया था
इस साल दूसरी तिमाही में रेटिंग एजेंसियों ने GDP में 10 से 11% तक गिरावट का अनुमान लगाया था। वहीं, आरबीआई में जीडीपी में 8.6% की गिरावट का अनुमान लगाया था। मूडीज ने 10.6 फीसदी, केयर रेटिंग ने 9.9%, क्रिसिल ने 12%, इक्रा ने 9.5% और एसबीआई रिसर्च ने जीडीपी में 10.7% फीसदी गिरावट का अनुमान जताया था।
क्या होती है जीडीपी
जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं। यह किसी देश के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा पैमाना है। अधिक जीडीपी का मतलब है कि देश की आर्थिक बढ़ोतरी हो रही है।
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