
जमीन के बाद अब भारतीय सेना की ताकत समंदर में भी बढ़ने वाली है। आज नौसेना में ऐसे त्रिदेव शामिल हुए हैं जो भारत की तरफ गलत नजर से देखने वालों के छक्के छुड़ा देगा। आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में तीन नौसैनिक युद्धपोत - आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरि और आईएनएस 'वाग्शीर' को राष्ट्र को समर्पित किया। आइए आपको बताते हैं कि इन तीनों की खासियत क्या है।
INS सूरत, P15B गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर प्रोजेक्ट का चौथा और अंतिम जहाज है, जो भारतीय नौसेना की ताकत को और भी बढ़ाएगा। यह जहाज दुनिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक विध्वंसकों में से एक है, जिसमें अत्याधुनिक हथियार प्रणाली और सेंसर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। INS सूरत विभिन्न प्रकार के हेलीकॉप्टरों को संचालन में सक्षम है, जिसमें चेतक, ALH, सी किंग और नए MH-60R हेलीकॉप्टर शामिल हैं। ये जहाज किसी भी संकट के समय सही और सटीक प्रतिक्रिया देने में सक्षम है।
INS नीलगिरि, P17A स्टील्थ फ्रिगेट प्रोजेक्ट का पहला जहाज है, जो भारतीय नौसेना की नई पीढ़ी के स्वदेशी युद्धपोतों का प्रतीक है। इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया है और इसमें अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाएं हैं, जो इसे बेहतर उत्तरजीविता, समुद्री क्षमता और स्टील्थ के मामले में एक कदम आगे बढ़ाती हैं।
इसमें आठ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों सहित कई एडवांस हथियार और सिस्टम लगे हैं, जो इसे समुद्र में किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए सक्षम बनाते हैं।
INS वाघशीर, P75 स्कॉर्पीन प्रोजेक्ट की छठी और आखिरी पनडुब्बी है, जो भारत की पनडुब्बी निर्माण क्षमता और सामरिक ताकत को दर्शाती है। इस पनडुब्बी का निर्माण फ्रांस के नेवल ग्रुप के सहयोग से किया गया है। और यह भारतीय सेना को और मजबुत करने में सहायता करेगी। INS वाघशीर की तकनीकी विशेषताएं इसे समुद्र में बेहद प्रभावशाली बनाती हैं। यह पनडुब्बी भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रतीक है और भारतीय नौसेना की सामरिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।
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