रूस-यूक्रेन युद्ध: जबरिया झोंके जा रहे भारतीय युवा, अबतक 12 मौतें, 16 लापता

Published : Jan 17, 2025, 11:49 PM ISTUpdated : Jan 17, 2025, 11:56 PM IST
Russian Army

सार

रूस-यूक्रेन युद्ध में कई भारतीय फंस गए हैं, जिनमें से कुछ की जान भी गई है। भारत सरकार इनकी वापसी के लिए प्रयास कर रही है और रूसी अधिकारियों से लगातार संपर्क में है।

Russia Ukraine war: रूस-यूक्रेन युद्ध का खामियाजा तमाम भारतीय भी भुगतने को मजबूर हैं। गलती से रूस पहुंचे दर्जनों इंडियन्स को रूस ने युद्ध में लड़ने के लिए भेज दिया गया है। रूस में गैरकानूनी तरीके से युद्ध में झोके जा रहे इंडियन्स में कम से कम 12 अपनी जान गंवा बैठे हैं जबकि 16 के आसपास लापता हैं। परेशान परिजन को लगातार दिलासा दिलाया जा रहा है। एक बार फिर विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि रूस में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए वह रूसी अधिकारियों के लगातार संपर्क में है। प्रधानमंत्री मोदी भी पुतिन से दो मुलाकातों में इस मुद्दे को उठा चुके हैं।

भारत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फंसे हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए रूस के साथ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। साथ ही भारतीय परिवारों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है।

96 भारतीय लौटे स्वदेश, 18 अब भी युद्ध में सक्रिय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने बताया कि भारत सरकार के पास जो आधिकारिक आंकड़ा मौजूद हैं उसके अनुसार 126 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल किया गया है। इन भारतीयों के परिजन की शिकायत के आधार पर यह आंकड़ा सामने आया है। जयसवाल ने बताया कि 196 भारतीय नागरिकों में 96 की वापसी करा दी गई है। इन इंडियन्स को रूसी सेना से मुक्त कराकर स्वदेश लौटाया लाया जा है। फिलहाल, 18 भारतीय अभी भी रूसी सेना में हैं और युद्ध क्षेत्र में हैं। इनमें से 16 का अतापता नहीं है। 16 भारतीयों को रूसी सेना ने लापता लिस्ट में डाल रखा है। उन्होंने बताया कि युद्ध में अबतक 12 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि रूस में फंसे भारतीय नागरिकों को छुड़ाने और उनकी स्वदेश वापसी के लिए रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है।

केरल का युवक युद्ध में मारा गया

दरअसल, इस सप्ताह के शुरुआत में केरल के एक युवक की रूस की ओर से लड़ते हुए मारे जाने की सूचना सामने आई। युवक के परिजन, विपक्ष और तमाम मानवाधिकार संगठनों ने जब आवाज उठायी तो भारत सरकार पर दबाव बढ़ा। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने तेजी दिखाते हुए इस मुद्दे को गंभीरता से रूसी अधिकारियों के सामने रखा।

पिछले साल जुलाई में पीएम मोदी ने पुतिन के सामने मुद्दा उठाया

पिछले साल 2024 के जुलाई महीना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस की यात्रा पर थे। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने इस मुद्दे को उठाया था। उसके बाद फिर से दुबारा अक्टूबर में कज़ान में आयोजित 16वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन से बातचीत के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता दी थी।

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