
नई दिल्ली। गुजरात के मोरबी में बीते रविवार को पुल गिरने (Morbi bridge collapse) से 135 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में नई जानकारियां सामने आने के साथ ही आरोप-प्रत्यारोप भी लग रहे हैं। कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने जानकारी दी है कि पुल की मरम्मत करने वाले ठेकेदार अयोग्य थे। पुल का फर्श बदल दिया गया, लेकिन केबल की मरम्मत नहीं की गई थी। यह भी नहीं देखा गया कि नए भारी फ्लोर का वजन केबल उठा पाएंगे या नहीं। दूसरी ओर आरोपी पक्ष द्वारा कोर्ट में हादसे को भगवान की मर्जी बताया गया है।
इसपर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि यह घटना भगवान की मर्जी नहीं, जानबूझकर की गई धोखाधड़ी है। प्रियंका ने ट्वीट किया कि ठेकेदार ने जंग लगे पुराने केबल को न तो बदला और न उसकी मरम्मत की। ठेकेदार के पास योग्य इंजीनियर नहीं थे। जिस कंपनी को पुल की मरम्मत का ठेका मिला उसके एक मैनेजर इंजीनियर नहीं बल्कि कंपनी में मीडिया मैनेजर है।
योग्य नहीं थे ठेकेदार
गौरतलब है कि अभियोजन पक्ष ने मंगलवार को कोर्ट में बताया कि पुल की मरम्मत करने वाले ठेकेदार योग्य नहीं थे। पुल के फर्श को बदला गया था, लेकिन केबल की मरम्मत नहीं की गई थी। यह केबल चार-परत वाली एल्यूमीनियम शीट के फर्श का वजन उठाने में सक्षम नहीं था।
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पुलिस ने इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुल का संचालन करने वाली कंपनी ओरेवा के दो मैनेजर और पुल की मरम्मत करने वाले दो ठेकेदारों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। सिक्योरिटी गार्ड और टिकट बेचने वाले क्लर्क सहित पांच लोगों को जेल भेजा गया है। पुल हादसे में ओरेवा समूह और नगरपालिका अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। ओरेवा समूह घड़ियां और ई-बाइक बनाती है। नगर निगम के अधिकारियों ने इस कंपनी को पुल के रखरखाव का जिम्मा सौंपा था।
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