जल्लीकट्टू 2025: मौत से दो-दो हाथ करने का रोमांच, परंपरा का संग्राम

Published : Jan 14, 2025, 05:15 PM ISTUpdated : Jan 14, 2025, 05:18 PM IST
Alanganallur Jallikattu

सार

तमिलनाडु में पोंगल के दौरान जल्लीकट्टू का धमाकेदार आयोजन! जानें इस प्राचीन खेल के रोमांच, परंपरा, और विवादों के बारे में।

JalliKattu 2025: पोंगल उत्सव में तमिलनाडु के पारंपरिक खेल जलीकट्टू का बड़े पैमाने पर आयोजन हो रहा है। जलीकट्टू के ऐतिहासिक खेल में देशभर से प्रतियोगी भाग लेने और दर्शक इसका लुत्फ उठाने के लिए पहुंच चुके हैं। अगले तीन दिनों से राज्य के तीन प्रमुख जगहों पर जलीकट्टू का रोमांचक खेल दिल की धड़कनों को बढ़ाएगा। आइए जानते हैं कि इस प्राचीन परंपरा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां...

पहले जानिए क्या है जलीकट्टू?

जल्‍लीकट्टू तमिलनाडु का एक परंपरागत खेल है, जो पोंगल त्यौहार पर आयोजित होता है। यह तमिल संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। "जल्लीकट्टू" शब्द तमिल के "सल्लि" (सिक्के) और "कट्टु" (पैकेज) से लिया गया है, जो बैल के सींगों पर बंधे इनाम को दर्शाता है। इसमें बैलों से इंसानों की लड़ाई कराई जाती है। हालांकि, इस खेल में कई बार जानें भी चली जाती हैं। लोगों की जान जाने की वजह से तमाम सामाजिक कार्यकर्ता और जिम्मेदार इस पर बैन की मांग करते रहे हैं। जल्लीकट्टू को तमिलनाडु के गौरव तथा संस्कृति का प्रतीक कहा जाता है। माना जाता है कि यह 2000 साल पुराना खेल है जो उनकी संस्कृति से जुड़ा है। इस वजह से इस पर बैन की कोशिशें बहुत कामयाब नहीं हो सकी हैं। प्राचीन तमिल साहित्य, जैसे संगम ग्रंथों में जल्लीकट्टू का वर्णन एक महत्वपूर्ण ग्रामीण परंपरा और युवाओं की वीरता के प्रदर्शन के रूप में मिलता है। इस खेल में प्रतिभागी बैल की कूबड़ को पकड़कर खुद को संतुलित रखते हुए बैल के साथ दौड़ लगाते हैं। इस खेल में बैलों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है और उनकी देखभाल के लिए कड़े नियम लागू होते हैं।

सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व

जल्लीकट्टू केवल एक खेल नहीं है बल्कि यह तमिलनाडु की कृषि आधारित संस्कृति और मनुष्य-पशु के बीच के रिश्ते का उत्सव है। यह स्थानीय पशु नस्लों, जैसे कंगायम बैलों के संरक्षण को बढ़ावा देता है। यह सामुदायिक भावना को भी मजबूत करता है और साहस व कौशल का प्रदर्शन करने का मंच प्रदान करता है। तमिल परिवारों के लिए यह परंपरा गर्व का विषय है और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों को सिखाने का अवसर है।

जल्लीकट्टू 2025: कब-कब और कहां है आयोजित

जल्लीकट्टू का खेल इस बार 14, 15 और 16 जनवरी को पोंगल उत्सव में कराया जा रहा है। इस रोमांचक खेल के लिए तीन प्रमुख स्थल चुने गए हैं। यह आयोजन इस बार अवनियापुरम, पालामेडु और आलंगनल्लूर में होगा। आलंगनल्लूर के मैदान में खेल का लुत्फ उठाने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक पहुंचते हैं। यहां प्रतिभागियों और बैलों के बीच की प्रतिस्पर्धा का रोमांच चरम पर होता है। इसके अलावा, पालामेडु और अवनियापुरम में भी जल्लीकट्टू के आयोजन अपनी अनूठी परंपराओं और नियमों के साथ होते हैं।

जल्लीकट्टू 2025: इनाम की घोषणा

इस बार अवनियापुरम में 1,100 बैल और 900 प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। सर्वश्रेष्ठ बैल-परामर्श खिलाड़ी को 8 लाख रुपये मूल्य की कार और सर्वश्रेष्ठ बैल के मालिक को 11 लाख रुपये का ट्रैक्टर इनाम में दिया जाएगा।

विवादित रहा है जल्लीकट्टू आयोजन, बैन भी लग चुका

पिछले कुछ वर्षों में जल्लीकट्टू पशु अधिकार संगठनों के विरोध और कानूनी विवादों के केंद्र में रहा है। 2014 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इसे पशु क्रूरता का हवाला देते हुए प्रतिबंधित कर दिया था। हालांकि, तमिलनाडु में व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद 2017 में राज्य कानून के जरिए इसे पुनः शुरू किया गया।

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