Jammu Kashmir में प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ बिजलीकर्मियों का हड़ताल खत्म, सेना ने संभाल लिया था मोर्चा

Published : Dec 21, 2021, 02:14 AM ISTUpdated : Dec 21, 2021, 02:15 AM IST
Jammu Kashmir में प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ बिजलीकर्मियों का हड़ताल खत्म, सेना ने संभाल लिया था मोर्चा

सार

जम्मू संभागीय आयुक्त राघव लंगर ने सोमवार आधी रात को जानकारी दी कि जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के कर्मियों ने हड़ताल समाप्त कर दिया है। प्रशासन के साथ कई राउंड की बैठक के बाद बिजलीकर्मियों ने यह फैसला किया।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ किए जा रहे हड़ताल को बिजलीकर्मियों ने समाप्त कर दिया है। जम्मू संभागीय आयुक्त (Jammu Divisional Commissioner) राघव लंगर ने सोमवार आधी रात को जानकारी दी है कि जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (Power Development Department) के कर्मियों ने हड़ताल समाप्त कर दिया है। प्रशासन के साथ कई राउंड की बैठक के बाद बिजलीकर्मियों ने यह फैसला किया है। 

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ बिजलीकर्मियों ने हड़ताल कर दिया था। करीब 20 हजार कर्मचारी  शुक्रवार आधी रात से हड़ताल पर चले गए थे। इसके चलते पूरे जम्मू-कश्मीर में ब्लैकआउट हो गया था। बिजलीकर्मियों की हड़ताल के चलते लोगों को काफी परेशानी हो रही थी। इस बीच प्रशासन द्वारा मदद मांगे जाने पर सेना ने मोर्चा संभाल लिया था। सेना को मदद के लिए बुलाए जाने के बाद जम्मू के कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई थी।

अपरिहार्य हैं बिजली क्षेत्र में सुधार
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर जम्मू संभागीय आयुक्त राघव लंगर ने रविवार को कहा था कि बिजली क्षेत्र में सुधार अपरिहार्य हैं। केंद्र ने हमें इसे सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। बिजली क्षेत्र में आने वाली निधियों और अनुदानों को कुछ सत्यापन योग्य उद्देश्य मानदंड और प्राप्त करने योग्य मापदंडों के साथ जोड़ा जाएगा। लोगों को सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना लक्ष्य है। सरकार जनहित की रक्षा के लिए ईमानदारी से काम कर रही है।

ये हैं कर्मचारियों की मांगें 
कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि बिजली संपत्ति के निजीकरण के केंद्र के फैसले को बदला जाए। दिहाड़ी मजदूरों को नियमित किया जाए और कर्मचारियों का वेतन जारी किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में दशकों से चली आ रही सरकारों द्वारा बनाई गई संपत्ति अब केंद्रीय शासन के तहत बिक्री की जा रही है। इस रोका जाए।

 

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