निर्भया केस की सुनवाई कर रही थीं जज भानुमति, तभी अचानक ऐसा क्या हुआ कि हो गईं बेहोश

Published : Feb 14, 2020, 02:52 PM ISTUpdated : Feb 14, 2020, 06:22 PM IST
निर्भया केस की सुनवाई कर रही थीं जज भानुमति, तभी अचानक ऐसा क्या हुआ कि हो गईं बेहोश

सार

निर्भया केस के दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनय की याचिका को  खारिज कर दिया। दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ विनय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। दूसरे मामला, दोषियों को अलग-अलग फांसी दिए जाने का था, जिसपर सुनवाई चल रही थी। 

नई दिल्ली. निर्भया केस के दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनय की याचिका को  खारिज कर दिया। दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ विनय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। दूसरे मामला, दोषियों को अलग-अलग फांसी दिए जाने का था, जिसपर सुनवाई चल रही थी, इसी दौरान जज आर भानुमति बेहोश हो गईं। उन्हें तुरन्त दूसरे कमरे में ले जाया गया।

"तेज बुखार की वजह से बेहोश हुईं"

जज आर भानुमति के बेहोश होने पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया, उन्हें तेज बुखार था। चैम्बर में डॉक्टरों द्वारा उसकी जांच की जा रही है। उनकी तबीयत पहले से खराब थी, लेकिन वह दवा खाकर सुनवाई करने आई थीं।  

दोषियों को अलग-अलग फांसी की मांग

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। सरकार की मांग है कि जिन- जिन दोषियों के सारे विकल्प खत्म हो चुके हैं उन्हें अलग-अलग फांसी दी जाए। हालांकि तिहाड़ जेल मैन्युअल के मुताबिक, जब तक चारों दोषियों के सारे कानूनी विकल्प खत्म नहीं जाते हैं, तब तक उनमें से किसी एक को भी फांसी नहीं दी जा सकती है।    

कोर्ट ने कहा, विनय पागल नहीं है

- सुप्रीम कोर्ट में विनय के वकील एपी सिंह ने एक दलील में कहा था कि विनय की मानसिक हालत ठीक नहीं है। वह मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहा है। इसलिए उसे फांसी नहीं हो सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि विनय की मानसिक हालत ठीक है। उसकी मेडिकल स्थिति स्थिर है।     

- वकील ने कहा था, विनय को कई बार मानसिक अस्पताल तक भेजा जा चुका है। उसकी मानसिक स्थिति इतनी खराब है कि वह दवाइयां लेता है। यह विनय शर्मा के जीने के अधिकार आर्टिकल 21 का हनन है। 

16 दिसंबर की रात हुआ था गैंगरेप, 29 दिसंबर को हुई मौत

दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।

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