
Kargil Vijay Diwas 2025: 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है। इसे मई से जुलाई 1999 तक भारत और पाकिस्तान के बीच लड़े गए कारगिल युद्ध में मिली जीत की याद में मनाते हैं। भारतीय सेना को 3 मई से 12 मई 1999 के बीच पाकिस्तान द्वारा की गई घुसपैठ का पता चला था। 26 मई 1999 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया था। आइए जानते हैं इस लड़ाई में भारत की सेनाओं ने किन हथियारों का इस्तेमाल किया।
बोफोर्स एफएच-77बी हॉवित्जर तोप: कारगिल युद्ध में भारत की सफलता का बड़ा श्रेय तोपखाने को दिया जाता है। भारत ने 155mm के बोफोर्स FH-77B हॉवित्जर तोप को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। इसने सटीक अटैक कर दुश्मन के बंकरों को कमजोर किया। उनकी सप्लाई लाइनों को बंद किया। तोपों की बौछार इतनी विनाशकारी थी कि भारतीय सेना ने 5 जुलाई को टाइगर हिल और प्वाइंट 4875 पर और 7 जुलाई, 1999 को मश्कोह घाटी पर कब्जा कर लिया। द्रास और मश्कोह उप-क्षेत्रों में तोपखाने के शानदार प्रदर्शन के सम्मान में भारतीय सेना ने प्वाइंट 4875 का नाम बदलकर "गन हिल" कर दिया।
इंडियन आर्मी ने दुश्मन के ठिकानों पर गोलाबारी के लिए BM-21 ग्रैड मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर का भी इस्तेमाल किया था। 130mm कैलिबर वाली M-46 फील्ड गन का इस्तेमाल लंबी दूरी की बमबारी के लिए किया गया। इसके अलावा L16 81mm और 120mm मोर्टार भी दागे गए।
पैदल सेना के हथियार: इंडियन आर्मी के पैदल सेना के जवान कई तरह के छोटे हथियारों से लैस थे। 5.56×45mm की इंसास राइफल का सैनिकों ने मुख्य रूप से इस्तेमाल किया। AK-47 का आधुनिक वर्जन AKM भी इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा 1A1 सेल्फ-लोडिंग राइफल (SLR) का इस्तेमाल भी किया गया।
पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर: पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर ने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन की पैदल सेना को भारी नुकसान पहुंचाया। ट्रकों पर लगाए गए लॉन्चर में 12 रॉकेट लगते हैं। इन्हें 44 सेकंड के भीतर फायर किया जा सकता है। बंकरों को नष्ट करने के लिए इंडियन आर्मी ने कार्ल गुस्ताफ रिकॉइललेस राइफल का इस्तेमाल किया। इग्ला और स्ट्रेला-2 जैसी पोर्टेबल एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें भी संभावित हवाई खतरे का मुकाबला करने के लिए तैनात की गईं।
बख्तरबंद वाहन: भारतीय सेना ने जहां संभव हुआ टी-72 टैंकों और बीएमपी-2 पैदल सेना लड़ाकू वाहनों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया। टी-72 टैंक को मुख्य रूप से मैदानी युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। इन्हें पहाड़ी इलाके में काम करने लायक बनाया गया।
मिराज 2000: वायुसेना ने मिराज 2000 से सटीक बमबारी की। पेववे II लेजर-गाइडेड बमों को दुश्मन के बंकरों पर गिराया गया। इससे जमीनी बलों को काफी मदद मिली। इसके साथ ही मिग-21, मिग-27 और मिग-29 लड़ाकू विमानों को भी तैनात किया गया। मिग-29 ने हवाई सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाई। जगुआर विमान का इस्तेमाल भारी बमबारी के लिए किया गया। इंडियन एयरफोर्स ने हवा से जमीन पर मार करने वाले KH-29 और KH-59 मिसाइलों से सटीक अटैक किए। इंडियन एयरफोर्स ने X पर वीडियो शेयर कर बताया है कि उसने कारगिल की लड़ाई में किन विमानों का इस्तेमाल किया।
चीता: हल्के वजन के इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल दुश्मन के ठिकाने की जानकारी लेने और घायलों को निकालने में हुआ। ये हेलीकॉप्टर बहुत अधिक ऊंचाई पर उड़ान भर सकते हैं।
चेतक: चेतक भी हल्के वजन का यूटिलिटी हेलीकॉप्टर है। इसका इस्तेमाल घायलों को निकालने के लिए किया गया।
Mi-17: Mi-17 का इस्तेमाल सैनिकों को जंग के मैदान में पहुंचाने में किया गया। इससे जरूरी सामान भी भेजे गए।
Mi-8: एमआई-8 का इस्तेमाल सैनिकों को ले जाने और दूरदराज के क्षेत्रों में अग्रिम पंक्ति की इकाइयों को रसद सहायता पहुंचाने के लिए किया गया।
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