
Stories of Lottery Winners: कहा जाता है कि ऊपर वाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के। अगर किसी की लॉटरी लगती है तो उस मामले में ये कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। ऐसा ही कुछ हुआ केरल के कारसगोड जिले के रहने वाले एक शख्स मोहम्मद बावा के साथ। कर्ज में गले-गले तक डूबे इस शख्स के घर पर अक्सर अपना पैसा मांगने वालों की भीड़ लगी रहती थी। कर्जदारों का पैसा नहीं चुका पाने की वजह से मोहम्मद बावा और उनका परिवार हमेशा मानसिक तनाव में जीता था।
धंधा हुआ चौपट, लेना पड़ा कर्ज :
एक समय मोहम्मद बावा का परिवार काफी संपन्ना था। उन पर कोई कर्ज नहीं था और वो अच्छी जिंदगी जी रहे थे। बावा कंस्ट्रक्शन फील्ड में ठेकेदारी करते थे। हालांकि, धीरे-धीरे काम-धंधा हल्का पड़ता गया। इसके बाद 2020 में अचानक कोरोना महामारी के चलते उनका काम पूरी तरह बंद हो गया। इससे उनके परिवार के लिए हालात बेहद मुश्किल हो गए। घर खर्च चलाने के लिए उन्हें ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा।
घर बेचने से 2 घंटे पहले खरीदा लॉटरी टिकट :
दिन-रात कर्ज न चुका पाने और घर की माली हालत बिगड़ने की वजह से बावा का परिवार बेहद तंगहाली में जी रहा था। मजबूर होकर उसने लोगों का कर्ज चुकाने के लिए अपना घर बेचने का फैसला कर लिया था। डील होने से दो घंटे पहले बावा अपने किसी दोस्त के कहने पर 50-50 लॉटरी का टिकट खरीद लाए। 25 जुलाई, 2022 की शाम को जब लकी ड्रॉ निकला तो बावा के टिकट पर जैकपॉट खुल गया। उन्हें 1 करोड़ रुपए की लॉटरी लगी।
लगा जैकपॉट और दूर हो गई सारी चिंता :
उत्तरी केरल के कासरगोड जिले के मंजेश्वर के रहने वाले 50 साल के मोहम्मद बावा और उनकी पत्नी अमीना ने अपनी दो बेटियों की शादी और कारोबार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए अपने रिश्तेदारों और बैंक से भारी कर्ज लिया था। इसे चुकाने के लिए उनहें करीब 50 लाख रुपए की सख्त जरूरत थी। हालांकि, लॉटरी खुलने के बाद उनकी सारी चिंता दूर हो गई है। टैक्स चुकाने के बाद बावा को करीब 63 लाख रुपए मिले, जिससे उन्होंने आसानी से अपना कर्ज चुका दिया।
कर्ज चुकाने के बाद की गरीबों की मदद :
मोहम्मद बावा के मुताबिक, मेरे लॉटरी जीतने के बाद देनदार चुप हो गए हैं। जब आपके पास पैसा नहीं होता है तभी लोग ताने मारते हैं। लेकिन अब उन्हें भी मालूम है कि मेरे पास पैसा है और मैं लौटा दूंगा, इसलिए अब कोई नहीं बोलता। बावा के मुताबिक, व्यापार में भारी नुकसान से मैं गहरे सदमे में था, लेकिन ऊपर वाले ने हमें इससे उबरने का एक रास्ता दिया है। बावा ने कर्ज चुकाने के बाद बची हुई रकम का कुछ हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए खर्च करने का फैसला किया था।
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