
नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश में उपचुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। बिहार में 70 सीटों पर लड़ी कांग्रेस को 19 सीटों पर जीत हासिल हुई। वहीं उत्तर प्रदेश में 7 सीटों पर हुए उपचुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी। इतना ही नहीं, यूपी में 6 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस की 4 सीटों पर जमानत ही जब्त हो गई। वहीं बिहार में भी 4 सीटों पर जमानत जब्त हो गई।
उत्तर प्रदेश में 4 सीटों पर जमानत जब्त
उत्तर प्रदेश में उपचुनाव की बात करें तो यहां मल्हनी, बांगरमऊ, देवरिया, बुलंदशहर, नौगांवा सादत, टूंडला और घाटमपुर सीटों पर उपचुनाव हुआ था। इसमें से मल्हनी सीट से एसपी के लकी यादव ने जीत हासिल की है। वहीं भाजपा ने बांगरमऊ, देवरिया, बुलंदशहर, नौगांवा सादत, टूंडला और घाटमपुर में जीत दर्ज की है। बांगरमऊ और घाटमपुर में कांग्रेस ने टक्कर दी, लेकिन बाकी चार सीटों (बुलंदशहर, मल्हनी, नौगावां सादात और देवरिया) पर उसकी जमानत जब्त हो गई।
बिहार में भी 4 सीटों पर जमानत जब्त
बिहार में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटों पर जीत हासिल की। चैनपुर, पारो, नालंदा और हरनौत विधानसभा सीट पर कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई। चैनपुर विधानसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी मोहम्मद जमां खान ने भाजपा के बृज किशोर को 24294 वोटों से हरा दिया। पारो विधानसभा में भाजपा के अशोक कुमार सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय शंकर प्रसाद को 14698 मतों से हराया। नालंदा विधानसभा सीट पर जेडीयू के श्रवण कुमार ने जीत हासिल की। कांग्रेस के गुंजन पटेल तीसरे नंबर पर रहे। हरनौत विधानसभा सीट पर जेडीयू के हरि नारायण सिंह ने जीत हासिल की।
कब जमानत जब्त होती है?
विधानसभा या लोकसभा सीट पर जितने भी वोट डाले गए हैं उसका छठा भाग उम्मीदवारों के लिए लाना जरूरी होता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो जमानत जब्त मानी जाती है। जैसे किसी विधानसभा सीट पर 50,000 वोटर हैं तो वहां किसी कैंडिडेट को जमानत बचाने के लिए 8,333 से अधिक वोट लाने होंगे।
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