
कोलकाता। कोविड -19 की समीक्षा के लिए बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की। इस दौरान चर्चा कोविड से हटकर पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर डायवर्ट हो गई। प्रधानमंत्री ने राज्यों से पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने की अपील की। इस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐतराज जताया है।
कहा- क्या आपने कभी अपनी आय देखी
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक ममता ने कहा- उन्होंने (पीएम ने ) पेट्रोल - डीजल और घरेलू गैस की बढ़ती कीमतों का मामला राज्यों पर छोड़ दिया कि राज्यों को कीमतों में कमी करनी चाहिए। लेकिन राज्य यह कैसे कर सकते हैं। ममता ने कहा कि कीमतें आपने बढ़ाई हैं। क्या आपने कभी अपनी आय देखी? ममता ने प्रधानमंत्री की बातों को भ्रामक कहते हुए कहा कि आपने लोगों से एकतरफा बातें कीं।
मैं तीन साल से पेट्रोल पर एक रुपए सब्सिडी दे रही
ममता ने कहा कि जहां तक मेरे राज्य की बात है तो आपको पता होना चाहिए कि पिछले 3 साल से मैं पेट्रोल पर 1 रुपए की सब्सिडी दे रही हूं। हमारी सरकार को 1.5 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। आपने इस पर कुछ नहीं कहा। आप पर हमारा 97,000 करोड़ रुपए बकाया है। अभी भारत सरकार पेट्रोल पर पश्चिम बंगाल सरकार की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक टैक्स लगा रही है।
राज्यों को राजस्व का 50 फीसदी हिस्सा मिले
हम कहते हैं कि केंद्र और राज्यों के लिए कर राजस्व 50 प्रतिशत होना चाहिए। लेकिन वे नहीं माने। वे 75 फीसदी हिस्सा लेते हैं। ऐसे में राज्य कैसे चलेंगे ? मैं पीएम से कहना चाहूंगी कि वह देखें कि राज्यों पर बोझ डालने के बजाय उन्हें दूसरी तरफ भी देखना चाहिए।
27 लाख करोड़ का हिसाब दें पीएम : कांग्रेस
कांग्रेस ने भी पीएम मोदी की राज्यों से वैट घटाने की अपील पर पलटवार किया। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 18.42 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 18.24 रुपए प्रति लीटर की कटौती करे। उन्होंने ट्वीट किया- मोदी जी, कोई आलोचना नहीं, कोई ध्यान भटकाना नहीं, कोई जुमला नहीं। कांग्रेस की सरकार में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.48 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 3.56 रुपए प्रति लीटर था। अब पेट्रोल पर यह 27.90 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 21.80 रुपए प्रति लीटर है। कृपया पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 18.42 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 18.24 रुपए प्रति लीटर की कमी करें। केंद्र सरकार को पिछले आठ साल में पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क के जरिये जुटाए गए 27 लाख करोड़ रुपये का हिसाब देना चाहिए।
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