
त्रिची। आजादी के 75 सालों के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली कई दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने लाती रहती हैं। तमिलनाडु के एक बेटे को अपनी बुजुर्ग मां का शव व्हीलचेयर पर श्मसान घाट तक ले जाना पड़ा। ढाई किलोमीटर तक व्हीलचेयर पर शव ढोने वाले बेटे को श्मसान घाट पर एक रिटायर्ड फौजी की मदद मिली और उन्होंने शव के अंतिम संस्कार में मदद की है।
यह है व्हीलचेयर में मां का शव ढोने का पूरा मामला
तमिलनाडु के त्रिची जिले के मणप्पराई के मुरुगनंदम पेशे से इलेक्ट्रिशियन हैं। मुरुगनंदम की 84 वर्षीय मां काफी दिनों से बीमार चल रहीं थीं। बताया जा रहा है कि उनको सोरायसिस था और काफी सालों से ट्रीटमेंट चल रहा था। महिला राजेश्वरी की तबीयत बुधवार को अचानक से बिगड़ गई। हालत बिगड़ने की जानकारी डॉक्टर्स को दी तो उन्होंने चेकअप के बाद घर पर ही रखने और इलाज जारी रखने की सलाह दी। गुरुवार को उनकी हालत और बिगड़ी और सुबह करीब चार बजे उनका निधन हो गया। महिला के निधन के बाद बेटे ने श्मसान प्रबंधन वालों को फोन किया। लेकिन कोई भी मदद को न आया। उधर, महिला की बीमारी की वजह से आसपास पड़ोस के लोग भी मदद को न आए।
कोई मदद को न आया तो शव व्हीलचेयर पर रख ले गया
मुरुगनंदम की मदद को जब कोई नहीं आया तो उन्होंने अपनी बुजुर्ग मां का शव एक कपड़े में लपेटकर व्हीलचेयर पर रखा और फिर श्मसान लेकर गए। वहां घाट पर कर्मचारियों को सूचित किया। इसी बीच घाट के पास के एक दूकानदार ने पूर्व सैनिक एन.श्रीधरन को फोन कर बताया कि कोई व्यक्ति अपनी मां का शव व्हीलचेयर पर लेकर आया है। श्रीधरन, स्थानीय लॉयन्स क्लब के ट्रस्टी भी हैं। पूरी बात जानने के बाद वह तत्काल मदद को पहुंचे। उन्होंने मुरुगनंदम से बात की और पूरी बात जानी। फिर डॉक्टर्स को फोन किया। सारे दस्तावेजों की जांच के बाद पूरे सम्मान के साथ महिला का हिंदू रीति-रीवाजों के साथ अंतिम संस्कार कराया।
मदद करने वाले पूर्व सैनिक ने क्या बताया?
पूर्व सैनिक एन.श्रीधरन ने कहा कि मुझे सुबह 6 बजे एक चाय विक्रेता का फोन आया। उसने बताया कि श्मशान के पास एक आदमी व्हीलचेयर में एक शव लाया है। वह गेट के बाहर इंतजार कर रहा। मैं तुरंत श्मशान गया और मैंने उससे पूछा उसने अपनी मां को व्हीलचेयर पर क्यों बिठाया। उस आदमी ने बताया दिया कि उसकी मां की मृत्यु उस सुबह 4.30 बजे हुई थी और वह सायरोसिस से पीड़ित थी। कोई मदद नहीं मिलने पर वह व्हीलचेयर पर उनको रखकर तीन किलोमीटर दूर श्मसान घाट तक लाया। श्रीधरन ने बताया कि मृतका के सारे दस्तावेज चेक किए। फिर जिस डॉक्टर का सर्टिफिकेट था, उससे पड़ताल किया गया। इसके बाद अंदर ले जाकर पूरे सम्मान व रीति-रीवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। मृतक राजेश्वरी अपने पीछे, पति पेरियासामी (90) और मुरुगनंदम के अलावा दो अन्य बेटों को छोड़ गई हैं।
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