
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटा लिया है। सरकार ने आर्टिकल 370 को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। सोमवार यानि 5 अगस्त को राज्यसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश किया गया। अब इस कानून के हटने के साथ ही राज्य में कई बड़े बदलाव हो सकते हैं। इसमें अब बाहरी लोग आकर जम्मू कश्मीर में जमीन खरीद सकते हैं। इससे पहले अनुच्छेद 35-ए के तहत सिर्फ जम्मू-कश्मीर के निवासी ही जमीन की खरीद-बिक्री कर सकते थे। आपको बता दें, जम्मू कश्मीर के अलावा भी देश में कई ऐसे राज्य हैं, जहां बाहरी लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
नागालैंड को भी मिला विशेषाधिकार
राज्य को 1963 से आर्टिकल 371(A) प्रावधान के तहत विशेष अधिकार मिला हुआ है। जिसमें कई मुद्दों पर कानून बनाए गए हैं। राज्य में होने वाली किसी भी तरह की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां में दखल नहीं दिया जा सकता है। नगा संप्रदाय के कानून में भी किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। नगा कानूनों के आधार पर नागरिक और आपराधिक मामलों में न्याय दिया जाने का प्रावधान है। जमीन का सौदा नहीं किया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश
जम्मू कश्मीर से बिल्कुल सटे हिमाचल प्रदेश में बाहरी लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं। जमीन खरीदने के लिए हिमाचल का निवासी होना जरूरी है। 1972 में यहां भूमि मुजारा कानून की धारा 188 लागू की गई थी, तब से ही राज्य में ये नियम लागू है।
हिमाचल के अलावा नॉर्थ ईस्ट में भी ऐसे कई राज्य (अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम और मणिपुर) शामिल है, जहां बाहरी लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं। वहीं दूसरी और सिक्किम में भी सिक्किम के रहने वाले लोगों को जमीन खरीदने की अनुमति है।
भारत के संविधान का अनुच्छेद 371एफ बाहरी लोगों को शामिल भूमि या संपत्ति की बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध लगाता है। इसके अलावा राज्य में सिर्फ आदिवासियों को जमीन खरीदने की अनुमति है।
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