मोदी कैबिनेट की मिटिंग में किन 2 रेल प्रोजेक्ट को मिला ग्रीन सिग्नल?

Published : Nov 26, 2025, 07:09 PM IST
Representative Image (File Photo/ANI)

सार

CCEA ने महाराष्ट्र और गुजरात में ₹2,781 करोड़ की दो रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे 224 किमी नई लाइनें जुड़ेंगी, जिससे क्षमता बढ़ेगी और कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इन प्रोजेक्ट्स से द्वारका और मुंबई कॉरिडोर को लाभ होगा।

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने रेल मंत्रालय के दो मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। ये प्रोजेक्ट्स महाराष्ट्र और गुजरात के चार जिलों को कवर करेंगे। CCEA की तरफ से जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स पर करीब 2,781 करोड़ रुपये की लागत आएगी और मौजूदा रेलवे नेटवर्क में लगभग 224 किलोमीटर की नई लाइनें जुड़ेंगी।

पहले प्रोजेक्ट में देवभूमि द्वारका (ओखा)-कनालुस लाइन को डबल करना शामिल है, जो 141 किलोमीटर लंबी है। वहीं, दूसरे प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र के बदलापुर और कर्जत के बीच 32 किलोमीटर के हिस्से में तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण किया जाएगा। दोनों प्रोजेक्ट्स का मकसद लाइन की क्षमता बढ़ाना, आवाजाही को बेहतर बनाना और ज्यादा भरोसेमंद और कुशल रेल सेवाएं देना है।

पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत बनाए गए इन प्रोजेक्ट्स का फोकस मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना और बेहतर प्लानिंग के जरिए लॉजिस्टिक्स की क्षमता को सुधारना है। इनके पूरा होने के बाद, पश्चिमी रेलवे कॉरिडोर पर लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही और भी आसान हो जाएगी। इन दो मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स से करीब 585 गांवों को फायदा होगा, जिनकी कुल आबादी लगभग 32 लाख है। खासकर, कनालुस-ओखा लाइन के डबल होने से भारत के बड़े तीर्थस्थलों में से एक, द्वारकाधीश मंदिर तक पहुंचना आसान हो जाएगा, जिससे सौराष्ट्र क्षेत्र में कनेक्टिविटी और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

महाराष्ट्र में, बदलापुर-कर्जत सेक्शन मुंबई सबअर्बन कॉरिडोर का एक अहम हिस्सा है। दो और लाइनों के जुड़ने से भीड़ कम करने, भविष्य में यात्रियों की मांग पूरी करने और देश के दक्षिणी हिस्सों से कनेक्टिविटी सुधारने में मदद मिलेगी। यह सेक्शन माल ढुलाई के लिए भी बहुत जरूरी है, जहां से कोयला, नमक, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद और कंटेनर जैसी जरूरी चीजें ले जाई जाती हैं।

रेल मंत्रालय ने बताया कि क्षमता बढ़ाने वाले इन कामों से हर साल करीब 1.8 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी। रेलवे एक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का साधन है। रेलवे को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट से तेल के आयात में लगभग 3 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 16 करोड़ किलोग्राम की कटौती होगी, जो करीब 64 लाख पेड़ लगाने के बराबर है।

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