
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बुधवार को कैबिनेट बैठक हुई। इस बैठक में सरकार ने कर्मयोगी योजना और जम्मू-कश्मीर के लिए राजभाषा विधेयक को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सरकार के फैसलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट बैठक में कर्मयोगी योजना को मंजूरी दे गई है। यह चयन के बाद सरकारी अफसरों में स्किल बढ़ाने का काम करेगी।
जानिए क्या है कर्मयोगी योजना?
कर्मयोगी योजना के जरिए सरकारी कर्मचारी अपनी परफॉर्मेंस में सुधार कर सकेंगे। इसके अलावा उनकी क्षमता में भी इजाफा होगा। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया, कर्मयोगी योजना के तहत सरकारी अफसरों के काम को किस तरह बेहतर किया जाए, इसे लेकर काम किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि भर्ती होने के बाद विभिन्न कर्मचारी, अधिकारी की क्षमता का लगातार वर्धन कैसे हो, इसके लिए क्षमता वर्धन का एक कार्यक्रम चलेगा। इसका नाम 'कर्मयोगी योजना' है और 21वीं सदी का सरकार के मानव संसाधन के सुधार का एक बहुत बड़ा सुधार कहलाएगा।
अब पेशेवर-ऊर्जावान बनेंगे अफसर
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव सी चंद्रमौली ने बताया कि मिशन कर्मयोगी व्यक्तिगत और संस्थागत क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। इसके तहत पीएम की मानव संसाधन परिषद होगी, पीएम की अध्यक्षता में राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस मिशन का उद्देश्य भारतीय सिविल सेवकों को आगे आने वाले समय के लिए अधिक रचनात्मक, कल्पनाशील, अभिनव, सक्रिय, पेशेवर, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी बनाकर भविष्य के लिए तैयार करना है।
ऑनलाइन मिलेगी ट्रेनिंग
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया मिशन कर्मयोगी के तहत शुरू किए गए नए डिजिटल प्लैटफॉर्म से अब सिविल सेवा से जुड़े अधिकारी कहीं भी बैठकर ट्रेनिंग ले सकेंगे। मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट के माध्यम से भी ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध होगी।
क्यों पड़ी इस तरह की ट्रेनिंग की जरूरत ?
- प्रशिक्षण प्राथमिकताओं में मानकीकरण, संस्थानों में योग्यता और शिक्षाशास्त्र का अभाव
-कार्य के लिए सही दक्षताओं के साथ अधिकारियों को खोजने में कठिनाई
- दक्षताओं और भूमिका में संपर्क की कमी
जम्मू-कश्मीर राजभाषा बिल को भी मंजूरी
उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के लिए राजभाषा विधेयक 2020 लाने का फैसला हुआ है। इसमें उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, हिन्दी और अंग्रेजी आधिकारिक भाषा रहेंगी।
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