
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री पर टिप्पणी को लेकर गुजरात विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा दायर मानहानि मामले को चुनौती देने वाली अरविंद केजरीवाल की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। मानहानि मामले में जारी समन को चुनौती देने वाली केजरीवाल की याचिका पहले गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
इसी मामले में पहले संजय सिंह द्वारा दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अप्रैल में खारिज कर दी थी। जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस एस वी एन भट्टी की पीठ ने इसी बात का हवाला देते हुए केजरीवाल की याचिका भी खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सभी विवादों का निपटारा ट्रायल में किया जा सकता है और वह मामले के गुण-दोष में नहीं जा रहा है।
केजरीवाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाया कि मोदी की डिग्री विश्वविद्यालय ने क्यों प्रकाशित नहीं की और क्या डिग्री फर्जी है? सिंघवी ने आगे कहा कि अगर बयान मानहानिकारक है, तो आपराधिक मानहानि का मामला मोदी को, न कि गुजरात विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को दायर करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बयान किसी भी तरह से विश्वविद्यालय को बदनाम नहीं करते।
विश्वविद्यालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संजय सिंह मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया। इसके बाद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि संजय सिंह के बयान अलग थे। एक समय पर, वकील ने कहा कि केजरीवाल अपने बयान पर खेद व्यक्त करने को तैयार हैं। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने इसका कड़ा विरोध किया और कहा कि शिकायतकर्ता को लापरवाही से बयान देने और फिर माफी मांगने की आदत है।
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