
मुंबई : RSS के वरिष्ठ प्रचारक मोरोपंत पिंगळे की जीवनी, ‘मोरोपंत पिंगळे : द हिंदू आर्किटेक्ट ऑफ हिंदू रिसर्चर’ का विमोचन सरसंघचालक मोहन भागवत ने किया। इस मौके पर भागवत ने कहा कि “पचहत्तर साल की उम्र के बाद रिटायर हो जाना चाहिए।” इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है।
भागवत ने कहा, “मोरोपंत जी कहते थे कि पचहत्तर साल के बाद समझ लो कि अब रुक जाना चाहिए, तुम्हारी उम्र हो गई है। अब दूसरों को काम करने दो।” इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनका इशारा किसकी तरफ है? संघ के अंदरूनी बदलाव और नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।
भागवत ने मोरोपंत के मजाकिया स्वभाव को याद करते हुए कहा, “उनका शरीर इतना बड़ा था कि जब घर में कोई मेहमान आता था तो बच्चे पूछते थे, कौन आया? लेकिन जब मैं आता था तो बच्चे पूछते थे, माँ ये क्या आया?” वो बाल स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा थे। उनका स्वभाव बहुत हल्का-फुल्का था। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन्होंने धैर्य, विनम्रता और संघ के प्रति समर्पण का परिचय दिया।
भागवत ने आगे कहा, “राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या आप इसके आर्किटेक्ट हैं? तो उन्होंने बिना देर किए कहा, ‘ये अशोक सिंघल जी से पूछो।’ उन्होंने कभी ‘मैंने किया’ नहीं कहा। उन्होंने जो भी किया, वो समर्पण और राष्ट्रभक्ति से किया।”
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता और सांसद संजय राउत ने भागवत के रिटायरमेंट वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी है। भागवत ने हाल ही में कहा था कि “पचहत्तर साल के बाद रुक जाना चाहिए।” इस बयान की राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है।
संजय राउत ने कहा, “अब सितंबर में नरेंद्र मोदी 75 साल के हो जाएँगे। उनकी दाढ़ी का रंग भी बदल गया है, सिर के बाल भी उड़ गए हैं। दुनिया भर घूम लिए, सत्ता के सारे सुख भोग लिए। अब रिटायरमेंट का नियम आपको भी लागू करना चाहिए। संघ उन्हें बार-बार इशारा कर रहा है कि अब आप किनारे हो जाओ। देश आपके हाथ में सुरक्षित है समझकर, उसे दूसरों के हाथ में सौंपने का समय आ गया है।”
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