
नई दिल्ली. निर्भया केस में दोषी पवन की नाबालिग होने की याचिका खारिज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका और दलीलों में कुछ भी नया नहीं है। कोर्ट के फैसले के बाद निर्भया की मां ने कहा, दोषियों की जो भी कोशिश है, वह धीरे-धीरे खत्म हो रही है। इनको बहुत बार टाइम दिया गया है। क्षमा याचिका डालने का वक्त है तो इस दौरान दोषी इधर-उधर भाग रहे हैं। दोषियों को माफ करने के सवाल पर निर्भया की मां ने कहा, हम महान नहीं है। कोई और महान हो सकता है। मैं एक बेटी की मां हूं। मेरी बेटी के साथ दरिंदगी हुई है। बेटी को इंसाफ चाहिए।
"घटना के वक्त नाबालिग था दोषी पवन"
कोर्ट ने पवन के वकील ने कहा कि जब निर्भया केस हुआ, उस वक्त पवन नाबालिग था। दोषी के वकील एपी सिंह ने अपनी दलील देते हुए कहा, दोषी पवन की जन्मतिथि 8 अक्टूबर 1996 है। हमारे पास दस्तावेज हैं। पवन अपराध के समय नाबालिग था।
स्कूल सर्टिफिकेट का जिक्र किया गया
एपी सिंह ने पवन के स्कूल गायत्री बाल स्कूल के सर्टिफिकेट का भी जिक्र किया। काउंटर में जस्टिस भानुमति ने कहा, जो दस्तावेज आप दे रहे हैं वह 2017 का है, जब कोर्ट ने आपको सजा सुना दी थी।
दोषी के वकील ने कहा, बड़ी साजिश हुई है
दोषी के वकील एपी सिंह ने कहा कि निर्भया केस में बड़ी साजिश हुई है। पुलिस ने जानबूझकर पवन की उम्र संबंधित दस्तावेजों की जानकारी छिपाई।
क्या है निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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