
नई दिल्ली. बीते साल 26 फरवरी को बालाकोट एयरस्ट्राइक के एक दिन बाद जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी अपने चरम पर थी। उस दौरान जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर के आसमान में भारत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमान आमने-सामने थे। तब एक MI-17 हेलिकॉप्टर के बड़गाम में क्रैश होने की खबर सामने आई। हेलिकॉप्टर क्रैश होने के बाद इस हादसे में 6 भारतीय वायुसैनिकों और एक नागरिक की मौत हो गई थी। ये घटना जहां विवादों में घिरी रही, वहीं इसी घटना में 17 वर्ष का लड़का मुदासिर अशरफ हीरो बनकर उभरा। जिसने अपनी जान पर खेलकर अन्य लोगों की जान बचाई थी। जिसे अब राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है।
हुए थे दो धमाके
मुदासिर के साथ जम्मू और कश्मीर से एक और बच्चे 16 वर्षीय सरताज मोइद्दीन मुगल को भी ये पुरस्कार मिला है। मुदासिर उन ग्रामीणों में शामिल था, जो हादसे का पता चलते ही क्रैश की जगह पर पहुंचे। हादसे के वक्त हेलीकॉप्टर जमीन पर खड़े किफायत हुसैन से भी टकराया था। जिससे उसके कपड़ों में भी आग लग गई। लंबे कद के कारण मुदासिर दौड़ने में अव्वल होने के कारण सबसे पहले वहां पहुंचा था। मुदासिर ने कहा, “मैं जब भागा तो सोचा कि हेलीकॉप्टर के पायलट को बचाने जा रहा हूं। क्योंकि तब मैं मलबे में फंसे एक शख्स को देख सकता था। हमें दो जोरदार धमाके सुनाई दिए थे, जिन्हें सुनकर सबने उस तरफ भागना शुरू कर दिया। ”
झोंक दी पूरी ताकत
मुदासिर के मुताबिक उस वक्त उसके दिमाग में ये नहीं था कि उसे खुद भी खतरा हो सकता है। मुदासिर ने आग में फंसे किफायत हुसैन को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की लेकिन दुर्भाग्य से हुसैन ने बाद में दम तोड़ दिया। मुदासिर ने बचाव टीमों के काम में भी बढ़-चढ कर हाथ बंटाया। इन बचाव टीमों में विभिन्न सुरक्षा बल और NDRF के जवान शामिल थे। मुदासिर ने वायुसैनिकों के शव भी हेलिकॉप्टर के मलबे से निकालने में भी बहुत मदद की थी।
स्थानीय लोगों ने मदद के लिए किया था विरोध
यहीं नहीं मुदासिर ने बाकी ग्रामीणों को भी बचाव टीमों की मदद करने के लिए प्रेरित किया था। जबकि कुछ स्थानीय लोग बचाव अभियान में सशस्त्र बलों की मदद करने का विरोध कर रहे थे। श्रीनगर के अमर सिंह कॉलेज में पढ़ने वाले मुदासिर ने बताया कि कैसे उसे राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिए जाने की सूचना मिली। मुदासिर ने बताया, “मेरे दरवाजे को कुछ सुरक्षाकर्मियों ने खटखटाया। फिर मुझे अवॉर्ड मिलने के बारे में बताया गया। इस वक्त घाटी में इंटरनेट पर बैन है। कुछ दिन बाद मुझे पोस्ट ऑफिस से एक चिट्ठी मिली। मैं ICCW का आभारी हूं कि उन्होंने वीरता पदक के लिए जम्मू और कश्मीर से दो बच्चों को चुना। मुझे पता है कि उन्हें हमें ढूंढने में काफी परेशानी हुई होगी।"
छत से लगा दी छलांग, फिर पूरे परिवार को बचाया
जम्मू और कश्मीर से राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार के लिए चुने गए दूसरे बच्चे सरताज की बहादुरी की कहानी भी कुछ कम नहीं। 16 वर्ष 7 महीने का सरताज कुपवाड़ा के तुमिना गांव में अपने घर की पहली मंजिल पर था कि आर्टिलरी का एक गोला वहां आकर फटा। ये घटना 24 अक्टूबर 2019 की है। उस वक्त पाकिस्तानी सेना की ओर से चौकीबल और तुमिना में बिना किसी उकसावे के भारी गोलाबारी की जा रही थी।
सरताज ने पहली मंजिल से छलांग लगा दी। सरताज को तब अहसास हुआ कि उसके माता-पिता और दो बहनें- सानिया (8 वर्ष) और सादिया (2 वर्ष) घर के अंदर फंसे हुए हैं। छलांग लगाने से टांग में गंभीर चोट आने के बावजूद सरताज घर में घुसा और माता-पिता, बहनों को सुरक्षित बाहर ले आया। फिर देखते ही देखते सरताज का घर मलबे में बदल गया। सरताज को इस बहादुरी का इनाम राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार के रूप में मिला है।
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