
नई दिल्ली. निर्भया केस में फांसी की तारीख टालने के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान दोषी मुकेश की वकील रेबेका जॉन ने कहा, केंद्र सरकार दोषियों को फांसी देने में देर करने का आरोप लगा रही है, लेकिन खुद ही दो दिन पहले जागा है।
अंतिम सांस तक हर विकल्प के इस्तेमाल का अधिकार
वकील रेबेका जॉन ने कहा, मेरे कानूनी उपायों का उपयोग करने के लिए आप मेरी निंदा नहीं कर सकते हैं। संविधान के अनुसार मुझे अपने जीवन के अंतिम सांस तक हर विकल्प का इस्तेमाल करने का अधिकार है।
दोषी के वकील एपी सिंह ने कहा, इतनी जल्दबाजी क्यों?
दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि दोषी गरीब, ग्रामीण और दलित परिवारों से हैं। सुप्रीम कोर्ट और संविधान में फांसी देने के लिए कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है।
2 बार टाली जा चुकी है फांसी
निर्भया केस के चारों दोषियों की फांसी की तारीख 2 बार टाली जा चुकी है। सबसे पहले दोषियों को 22 जनवरी को फांसी होनी थी, लेकिन याचिका दायर होने की वजह से फांसी टाल दी गई। इसके बाद अगली तारीख 1 फरवरी को तय की गई। लेकिन दया याचिका पेंडिंग होने की वजह से दोबारा फांसी की तारीख टाल दी गई।
मौत से बचने के लिए दोषियों के पास कितने विकल्प?
दोषी मुकेश और विनय की सुप्रीम कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद रिव्यू, क्यूरेटिव और फिर दया याचिका खारिज हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में रिट डालने का अधिकार हमेशा रहता है। अक्षय की रिव्यू और क्यूरेटिव खारिज हो चुकी है, लेकिन दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है। पवन की क्यूरेटिव पिटिशन और दया याचिका दोनों ही बची है।
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