
नई दिल्ली. महाराष्ट्र में पिछले एक महीने से चली आ रही राजनीतिक उठापटक में शनिवार सुबह एक नया मोड़ आ गया। राज्य में सरकार बनाने का न्योता ठुकराने वाली भाजपा ने विपक्षी पार्टी NCP के साथ मिलकर सरकार बना ली। सुबह-सुबह देवेन्द्र फड़णवीस ने मुख्यमंत्री और अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री की शपथ भी ले ली। इसके बाद NCP, शिवसेना और कांग्रेस के सभी नेता जागे और भाजपा को समर्थन देने वाले विधायकों को वापस अपने साथ ले आए। फड़णवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहेंगे या नहीं यह आने वाला वक्त ही बताएगा, पर इस पूरे घटनाक्रम से शरद पवार के परिवार में फूट स्पष्ट रूप से सामने आ गई।
NCP में पावर को लेकर लंबे समय से कलह चली आ रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी अजीत पवार के बेटे पार्थ ने चुनाव लड़ने की जिद की थी। इसके बाद शरद पवार ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। इस समय खबरें आई थी कि शरद पवार की पार्टी में पकड़ कमजोर पड़ रही है इसी वजह से वो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। शरद पवार का कहना था कि वो सोलापुर और सुप्रिया माढा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में अगर पार्थ भी मवल सीट से चुनाव लड़ेंगे तो पार्टी के कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाएगा। इसके बाद पार्थ ने चुनाव लड़ने की जिद कर ली थी, तब शरद ने खुद चुनाव न लड़ने का फैसला किया था।
शरद पवार के अलावा उनकी बेटी सुप्रिया ने भी परिवार में फूट की बात कही है। सुप्रिया ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में लिखा था "पार्टी और परिवार बंट चुका है।"
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