
नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप के दोषियों को इसी महीने 22 जनवरी को फांसी दी जानी है। सुबह 7 बजे दोषियों को सात पहले उनके कुकर्मों की सजा मिलेगी। पूरी दुनिया में इन दरिंदों की फांसी की चर्चा है, देश में लोग पीड़िता को इंसाफ मिलने पर खुश है। अब निर्भया के दरिंदों की फांसी पर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने सवाल उठाए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर रविवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पहुंची थीं।। मेधा पाटकर ने ट्रामा सेंटर में आयोजित कार्य्रकम में विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश गलत दिशा में जा रहा है। इसको बचाने के लिए युवाओं का एकजुट होना जरूरी है।
146 देशों में बैन है फांसी की सजा
उन्होंने निर्भया के दोषियों को फांसी की निंदा की। कहा कि 146 राष्ट्रों में फांसी की सजा बंद कर दी गई है। ऐसे में भारत देश से भी फांसी के बजाय उम्रकैद की सजा ही देनी चाहिए।
मेधा पाटकर का ये बयान काफी चर्चा में है।
पाटकर ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), एनआरसी और एनपीआर का विरोध किया। कहा कि यह मुस्लिम ही नही, हर वर्ग के लिए काला कानून से कम नही है।
जेएनयू छात्रों से की मुलाकात
उन्होंने 15 दिसम्बर को कैम्पस में हुए बवाल की निंदा की। बवाल के दौरान पुलिस ने जिस होस्टल में घुसकर आंसू गैस के गोले छोडे थे, उस होस्टल में पहुंचकर छात्रो से बातचीत कर हाल जाना। जेएन मेडिकल कॉलेज के वार्ड में पहुंचकर बवाल के दौरान घायल हुए छात्रों से बातचीत की थी।
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