
नई दिल्ली. निर्भया के दरिंदों को 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी होनी है। हालांकि, दोषी अगर कानूनी विकल्प अपनाते हैं तो यह तारीख और आगे बढ़ सकती है। 2013 में इस मामले में निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन तब से ही कानूनी पेंच में यह सजा फंसी हुई है। निर्भया की मां और पिता के लिए हर एक दिन बोझ की तरह लगता है। निर्भया के पिता बताते हैं कि दरिंदों की याचिका से उनकी धड़कने तेज हो जाती हैं।
पटियाला कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी किया था। अब 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी। हालांकि, अभी यह तारीख और बढ़ाई जा सकती है। दरअसल, अभी दोषियों के पास कानूनी विकल्प बचे हैं। नियमों के मुताबिक, जब तक कोर्ट में या राष्ट्रपति के पास किसी भी दोषी की याचिका पेंडिंग होगी, तब तक उसे फांसी नहीं हो सकती। इससे पहले 22 जनवरी को फांसी की तारीख तय की गई थी।
13 दिन तक लड़ी थी मौत से जंग
16 दिसंबर, 2012 की रात में 23 साल की निर्भया से दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 6 लोगों ने दरिंदगी की थी। साथ ही निर्भया के साथ बस में मौजूद दोस्त के साथ भी मारपीट की गई थी। दोनों को चलती बस से फेंक कर दोषी फरार हो गए थे। 29 दिसंबर को निर्भया ने सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
हर एक दिन को गिनती थी निर्भया
निर्भया 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ती रही। इस दौरान उसके माता पिता भी साथ रहे। निर्भया इस दौरान हर एक दिन को गिनती थी। पिछले दिनों एक चैनल को दिए इंटरव्यू में मां ने बताया था, निधन वाले दिन बेटी ने हम दोनों से कहा कि आप लोग जल्दी से जाकर खाना खा कर आओ। थोड़ी देर में किसी ने पुकारा और कहा कि आपकी बेटी बुला रही है। वहां गए तो देखा उसकी आंखों बंद हो रही थीं। वह हमें देख नहीं पाई। फिर उसने कभी आंखें नहीं खोलीं।
'निर्भया को मौत का अहसास हो गया था'
उन्होंने बताया, जिस दिन निर्भया का निधन हुआ, उस दिन शायद उसे पता चल गया था। उसने अपने पापा को बुलाया और बोली, आई एम सॉरी पापा। मैंने आप दोनों को बहुत तकलीफ दी है। फिर मेरा हाथ पकड़ा और अपने गले लगा लिया। उस वक्त हम सिंगापुर के अस्पताल में थे।
मां ने बताया था कि मौत से पहले निर्भया उंगलियों पर दिन गिना करती थी। वह मुझसे बोलती थी, मां आज कौन सा दिन है। बहुत दिन हो गए हैं। मुझे घर जाना है। जब नर्स कहती कि अभी तबीयत ठीक नहीं है, तब वह मायूस हो जाती थी। इस दौरान वह काफी डरी रहती थी।
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