निर्भया की मां ने लगाए आरोप, जज दोषियों का डेथ वांरट जारी नहीं कर रहे, बल्कि उनका समर्थन कर रहे

Published : Feb 12, 2020, 03:09 PM ISTUpdated : Feb 12, 2020, 04:18 PM IST
निर्भया की मां ने लगाए आरोप,  जज दोषियों का डेथ वांरट जारी नहीं कर रहे, बल्कि उनका समर्थन कर रहे

सार

निर्भया मामले में बुधवार को पटियाला कोर्ट में सुनवाई हुई। यह सुनवाई निर्भया की मां की उस याचिका पर हुई, जिसमें उन्होंने दोषियों का नया डेथ वारंट जारी करने की मांग की है। सुनवाई के दौरान निर्भया की मां कोर्ट में ही रो पड़ीं और कोर्ट रूम से बाहर आ गईं।

नई दिल्ली. निर्भया मामले में दोषियों का नया डेथ वारंट जारी रखने पर बुधवार को दिल्ली की पटियाला कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोषी पवन गुप्ता को कानूनी मदद देने के लिए कहा। इस दौरान निर्भया की मां कोर्ट में ही रो पड़ीं। उन्होंने कहा, मेरे अधिकारों का क्या? मैं यहां हाथ जोड़े खड़ी हूं। कृप्या डेथ वारंट जारी कर दो। मैं भी इंसान हूं। अब सात साल से ज्यादा का समय हो गया। 

कोर्ट ने सुनवाई गुरुवार तक टाल दी है। साथ ही कोर्ट ने पवन को नया वकील चुनने की इजाजत दे दी है। उधर, निर्भया की मां रो कर बाहर आ गईं।  उन्होंने कहा, मैं अब उम्मीद और विश्वास खो रही हूं। कोर्ट को दोषियों को बार बार देरी करने की रणनीति को समझना चाहिए। अगर पवन के दोषी को नया वकील मिलेगा तो वह और समय लेगा।  

जज दोषियों का समर्थन कर रहे- निर्भया की मां
निर्भया की मां ने कहा, जज दोषियों का समर्थन कर रहे हैं और उन्हें फांसी देने की तारीख तय नहीं कर रहे। मैं सुप्रीम कोर्ट से अपील करती हूं कि दोषियों का डेथ वारंट जारी करे। क्यों कि पटियाला कोर्ट का डेथ वारंट जारी करने का कोई मन नहीं है। 

'पता नहीं कोर्ट क्यों नहीं समझ रही'
निर्भया की मां ने कहा, मैं अपनी बेटी के लिए न्याय पाने के लिए यहां-वहां भटक रही हूं। ये अपराधी देरी करने के लिए रणनीति का इस्तेमाल कर रहे हैं। मुझे नहीं पता कि अदालत इसे क्यों नहीं समझ पा रही है।

अलग अलग फांसी देने की केंद्र की याचिका खारिज
इससे पहले केंद्र सरकार इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची थी। केंद्र सरकार ने कहा था, कानूनी विकल्पों का फायदा लेकर दोषी फांसी को टालने में कामयाब हो रहे हैं। इसलिए जिनके विकल्प खत्म हो गए हैं, उन्हें फांसी दे दी जाए। कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने दोषियों को 7 दिन के भीतर कानूनी विकल्प का इस्तेमाल करने के लिए कहा था।

किस किस के पास क्या विकल्प हैं?

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