प्रवासी मजदूर: वित्त मंत्री की सोनिया गांधी से हाथ जोड़कर अपील, कहा- राजनीति नहीं जिम्मेदारी समझें

Published : May 17, 2020, 03:26 PM ISTUpdated : May 17, 2020, 03:28 PM IST
प्रवासी मजदूर: वित्त मंत्री की सोनिया गांधी से हाथ जोड़कर अपील, कहा- राजनीति नहीं जिम्मेदारी समझें

सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की आखिरी किस्त का ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर राजनीति करने का आरोप लगाया। 

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की आखिरी किस्त का ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने हाथ जोड़कर अपील की कि इस मुद्दे पर हमें मिलकर काम करना होगा, मैं हाथ जोड़कर सोनिया गांधी से अपील करती हूं कि इस मामले में राजनीति ना करें। 

देश में प्रवासी मजदूर लगातार पैदल पलायन कर रहे हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस समेत विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमला बोल रहे हैं। अब निर्मला सीतारमण ने पलटवार करते हुए कहा, राहुल गांधी की उस तस्वीर पर भी सवाल उठाए, जिसमें वे सड़क पर बैठकर मजदूरों से बात कर रहे थे। निर्मला ने कहा, राहुल गांधी ने ऐसा करके मजदूरों का वक्त खराब किया। 

जिम्मेदारी समझें सोनिया- सीतारमण
सीतारमण ने कहा, मैं प्रवासी मजदूरों से कहना चाहती हूं कि प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर हमें मिलकर काम करना चाहिए। सभी राज्य मिलकर काम कर रहे हैं। मैं सोनिया गांधी से हाथ जोड़कर कहना चाहती हूं, इस मुद्दे पर सरकार से बात करें और प्रवासी मजदूरों के प्रति जिम्मेदारी समझें। 

'सूटकेस पकड़कर चलना था'
निर्मला सीतारमण ने कहा, कांग्रेस इस राहत पैकेज को ड्रामा बता रही है, लेकिन असली ड्रामेबाज वह खुद हैं। उन्होंने कहा, राहुल गांधी मजदूरों के साथ बैठकर उनका टाइम खराब कर रहे थे। इससे अच्छा होता कि वे बच्चों का सूटकेस पकड़कर उनके साथ पैदल चलते। 

सरकार मजदूरों के रहने खाने का हर संभव प्रयास कर रही
निर्मला सीतारमण से पूछा गया कि जो प्रवासी मजदूर अभी रास्ते में हैं, उन्हें  पीडीएस और मनरेगा के तहत जो घोषणाएं हुईं, उनका लाभ कैसे मिलेगा। इस पर निर्मला ने कहा, केंद्र सरकार ने लोगों से अपील की थी कि वे जहां हैं, वे वहां रहें। सरकार उनके खाने पीने और रहने का इंतजाम करने की हर संभव कोशिश कर रही है। लेकिन जब मजबूर लोग घर जाना चाहते हैं, उनके लिए केंद्र और रेलवे ने ट्रेन चलाना शुरू किया। 

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