
नई दिल्ली। अफगानिस्तान (Afghanistan) मुद्दे पर अमेरिका (America) और रूस (Russia) के बीच भारत (India) कंसल्टेशन ब्रिज का काम करने जा रहा है। आतंकवाद की राह पर तालिबान (Taliban) को रोका जाए इसके लिए अमेरिका और रूस एक साथ रणनीति तैयार करेंगे इसमें भारत दोनों देशों के बीच में ब्रिज का काम करेगा। 16 दिनों की कूटनीतिक प्रयासों के बाद अमेरिका के खुफिया चीफ, रूस सुरक्षा परिषद के मुखिया और अपने देश के एनएसए ने भारत की जमीन पर एकसाथ बात की है। रूस के सुरक्षा परिषद का प्रोग्राम तो सार्वजनिक रहा लेकिन अमेरिका के सीआईए (CIA) चीफ विलियम बर्न्स की यात्रा को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है।
मुलाकात इसलिए ताकि तालिबान आतंकवाद को न दे प्रश्रय
काबुल में तालिबान पर नकेल कसने, आतंकवाद के खिलाफ उनसे प्रतिबद्धता हासिल करने और कानून का शासन बहाल करने की चुनौती को साकार करने के लिए कई देश चिंतित है। भारत भी इसको लेकर सबसे अधिक चिंतित है क्योंकि वह सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है। इन्हीं चिंताओं को देखते हुए भारतीय प्रयासों के तहत अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के प्रमुख विलियम बर्न्स और रूसी सुरक्षा परिषद के प्रमुख निकोलाई पत्रूशेव एक साथ नई दिल्ली में मिले। इससे चीन और पाकिस्तान में खलबली मची हुई है, क्योंकि दोनों तालिबान के मददगार बने हुए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।
लेकिन सीआईए चीफ की यात्रा के बारे में कुछ सार्वजनिक नहीं
हालांकि, CIA चीफ की भारत यात्रा को गोपनीयता के पर्दे में रखा गया। उनकी यात्रा की पुष्टि या खंडन करने को भी कोई सरकारी सूत्र तैयार नहीं है।
24 अगस्त को मोदी और पुतिन के बीच हुई थी बात
बीते 24 अगस्त को पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इसी बातचीत के बाद रूसी सुरक्षा परिषद के चीफ ने भारत यात्रा की है। पत्रूशेव बुधवार को प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मिले। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन के बीच वार्ता से सीआईए की एक कोर टीम की भारत यात्रा का रोडमैप तैयार हुआ था।
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